UPI Charge News: आम आदमी की जेब पर नहीं पड़ेगा असर, 95% पेमेंट रहेंगी शुल्क-मुक्त
UPI Charge: संसद में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक पास होने के बाद UPI पेमेंट पर चार्ज लगाए जाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, आम UPI यूजर्स के लिए फिलहाल राहत की खबर है। सरकार और NPCI की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ग्राहकों से UPI पेमेंट करने के लिए सीधे तौर पर कोई शुल्क लेने का फैसला नहीं किया गया है।

पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, देश में होने वाले 95 फीसदी से अधिक UPI ट्रांजेक्शन फ्री रह सकते हैं। खास तौर पर छोटी राशि के डिजिटल भुगतान और छोटे व्यापारियों को किए जाने वाले पेमेंट पर Merchant Discount Rate यानी MDR लगाए जाने की संभावना बेहद कम है।
₹2,000 से कम के UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज?
UPI चार्ज को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चाय, नाश्ता, सब्जी या किराने का सामान खरीदने पर किए जाने वाले भुगतान पर भी शुल्क लगेगा? मौजूदा जानकारी के अनुसार, ऐसा होने की संभावना नहीं है। वित्त वर्ष 2025-26 में Person-to-Merchant (P2M) UPI पेमेंट्स में केवल करीब 4 फीसदी ट्रांजेक्शन ₹2,000 से अधिक के थे। यानी अधिकांश मर्चेंट ट्रांजेक्शन छोटी राशि के हैं।
पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, छोटे कारोबारियों के यहां UPI पेमेंट की औसत राशि करीब ₹100 से ₹200 के बीच होती है। ऐसे में चाय की दुकान, किराना स्टोर, सब्जी विक्रेता और छोटे दुकानदारों को किए जाने वाले छोटे UPI भुगतान को शुल्क-मुक्त रखने की संभावना है।
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बड़े कारोबारियों पर लग सकता है MDR
अगर भविष्य में UPI पर MDR लागू किया जाता है, तो इसका दायरा मुख्य रूप से बड़े व्यापारियों तक सीमित रखने पर विचार किया जा सकता है।
संभावित तौर पर—
- बड़े शॉपिंग मॉल
- बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां
- बड़े कॉरपोरेट
- अधिक टर्नओवर वाले मर्चेंट
इसके दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, किस ट्रांजेक्शन पर कितना MDR लगेगा और किन व्यापारियों पर लागू होगा, इसका अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
क्या ग्राहकों को UPI इस्तेमाल करने के पैसे देने होंगे?
फिलहाल नहीं। UPI यूजर्स को लेकर सरकार की ओर से राहत दी गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी स्पष्ट कर चुकी हैं कि NPCI की स्टीयरिंग कमेटी ने MDR को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है, तो इसका उद्देश्य ग्राहकों से सीधे शुल्क वसूलना नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि आम आदमी के लिए रोजमर्रा के UPI पेमेंट पर सीधे चार्ज लगने की संभावना फिलहाल नहीं है।
MDR क्या होता है?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने के लिए व्यापारी की ओर से बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को दिया जाता है। यह शुल्क ग्राहक द्वारा सीधे नहीं दिया जाता। इसका इस्तेमाल पेमेंट सिस्टम को संचालित करने, ट्रांजेक्शन प्रोसेस करने और डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने की लागत को पूरा करने के लिए किया जाता है। UPI को लंबे समय से Zero-MDR व्यवस्था के तहत चलाया जा रहा है। इसी वजह से छोटे व्यापारियों के बीच UPI तेजी से लोकप्रिय हुआ है।
आखिर UPI पर MDR की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?
भारत में डिजिटल पेमेंट का नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश में 24,000 करोड़ से अधिक UPI ट्रांजेक्शन हुए और इनकी कुल वैल्यू करीब ₹314 लाख करोड़ रही। इतने बड़े पेमेंट नेटवर्क को 24 घंटे चालू रखने के लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और फ्रॉड प्रिवेंशन सिस्टम की जरूरत होती है।
पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि UPI नेटवर्क को चलाने, सुरक्षा मजबूत करने और नई तकनीक में निवेश के लिए हर साल बड़ी रकम खर्च होती है। ऐसे में बड़े मर्चेंट्स से सीमित MDR लेने का विकल्प लंबे समय से चर्चा में है।
95 फीसदी से ज्यादा UPI ट्रांजेक्शन पर असर नहीं
UPI चार्ज को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 95 फीसदी से अधिक UPI ट्रांजेक्शन पर किसी तरह का शुल्क लगाए जाने की संभावना नहीं बताई जा रही है। इसका सीधा फायदा रोजमर्रा के छोटे डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों को मिलेगा। चाय-किराना, सब्जी, दूध या छोटे दुकानदारों को किए जाने वाले भुगतान पहले की तरह आसान और कम लागत वाले बने रह सकते हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि MDR लागू करने को लेकर अंतिम दर, सीमा और पात्र मर्चेंट्स की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल UPI को लेकर किसी भी तरह के नए चार्ज को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
