Block Spam Permanently: स्पैम कॉल्स से मिलेगी स्थायी राहत! TRAI ला रहा नया सिस्टम, Meta और Google की मदद से होगी सख्त कार्रवाई
Block Spam Permanently: अगर आप भी रोज़ाना आने वाली स्पैम कॉल्स, फर्जी मैसेज और WhatsApp पर आने वाले अनचाहे संदेशों से परेशान हैं, तो जल्द ही आपको बड़ी राहत मिल सकती है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) एक ऐसे नए सिस्टम पर काम कर रहा है, जो स्पैम कॉल्स और मैसेज पर पहले से कहीं अधिक प्रभावी तरीके से रोक लगाएगा।

इस नई व्यवस्था को तैयार करने के लिए TRAI, Meta (WhatsApp) और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य स्पैम कॉल्स और मैसेज की शिकायतों को सीधे टेलीकॉम ऑपरेटर्स तक पहुंचाना है, ताकि दोषी नंबरों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
TRAI क्या नया सिस्टम ला रहा है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, TRAI Meta और Google के साथ मिलकर ऐसा सिस्टम विकसित करने की तैयारी कर रहा है, जिसमें यूजर्स द्वारा WhatsApp या Google Dialer पर की गई स्पैम रिपोर्ट सीधे टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क तक पहुंचेगी। इससे बार-बार अलग-अलग नंबरों से स्पैम कॉल या मैसेज भेजने वाले लोगों की पहचान करना आसान होगा और उन पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
कैसे करेगा काम?
प्रस्तावित सिस्टम में यदि कोई यूजर किसी नंबर को WhatsApp या Google Dialer पर Spam के रूप में रिपोर्ट करता है, तो वह जानकारी सीधे:
- DLT (Distributed Ledger Technology) प्लेटफॉर्म
- TRAI के Do Not Disturb (DND) सिस्टम
- संबंधित टेलीकॉम ऑपरेटर
तक पहुंच जाएगी।
इससे स्पैम करने वाले नंबरों का रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा और उनके खिलाफ तेजी से कार्रवाई संभव होगी।
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अभी क्यों है दिक्कत?
फिलहाल टेलीकॉम कंपनियां केवल DLT प्लेटफॉर्म के जरिए टेलीमार्केटर्स की निगरानी करती हैं, जबकि आम उपभोक्ता अपनी शिकायत DND पोर्टल पर दर्ज करते हैं। दूसरी ओर, अधिकांश स्पैमर्स अब पारंपरिक कॉल या SMS की बजाय WhatsApp और अन्य इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूद डेटा एक-दूसरे से जुड़ा नहीं होने के कारण प्रभावी कार्रवाई में दिक्कत आती है।
Meta और Google की भूमिका क्यों अहम?
TRAI चाहता है कि Meta और Google अपने प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली स्पैम रिपोर्ट्स का डेटा टेलीकॉम ऑपरेटर्स के साथ साझा करें।
यदि ऐसा होता है तो:
- फर्जी नंबरों की पहचान आसान होगी।
- बार-बार स्पैम करने वालों की ब्लैकलिस्ट तैयार की जा सकेगी।
- इंटरनेट आधारित स्पैम कॉल्स और मैसेज पर भी प्रभावी नियंत्रण मिलेगा।
नए सिस्टम से यूजर्स को क्या मिलेगा फायदा?
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद:
- स्पैम कॉल्स और मैसेज में कमी आएगी।
- WhatsApp स्पैम पर भी तेजी से कार्रवाई होगी।
- अलग-अलग नंबरों से परेशान करने वाले स्पैमर्स की पहचान आसान होगी।
- टेलीकॉम कंपनियां तुरंत नंबर ब्लॉक या प्रतिबंधित कर सकेंगी।
- उपभोक्ताओं को सुरक्षित और बेहतर डिजिटल अनुभव मिलेगा।
डिजिटल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि TRAI, Meta और Google के बीच यह डेटा-शेयरिंग सिस्टम सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तो भारत में स्पैम कॉल्स और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है। यह पहल देश के करोड़ों मोबाइल और इंटरनेट यूजर्स के लिए डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
