Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने की शर्तों पर क्यों उठ रहे हैं सवाल? सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
Sonam Wangchuk: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के लिए रखी गई नई शर्तों को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे वांगचुक को पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए 18 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उन्होंने ड्रिप और तरल पदार्थ लेने से इनकार करते हुए अपना अनशन जारी रखने की बात कही।

हालांकि, सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की गई पोस्ट में उन्होंने अनशन समाप्त करने के लिए तीन नई शर्तें रखीं। इन्हीं शर्तों को लेकर अब उनके रुख पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
क्या हैं सोनम वांगचुक की नई शर्तें?
वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था की हालिया विफलताओं, विशेषकर पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करती है, या राजनीतिक दल संसद में इस मुद्दे को मजबूती से उठाने का भरोसा देते हैं, अथवा विभिन्न दलों के सांसद अस्पताल आकर आश्वासन देते हैं, तो वे अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग गायब
विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि उनकी नई शर्तों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कोई उल्लेख नहीं है। जबकि अब तक उनका आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी की प्रमुख मांग यही रही थी। इसी कारण कई पत्रकारों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं कि क्या वांगचुक ने अपने मूल आंदोलन से दूरी बना ली है।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार ने सवाल किया कि क्या सोनम वांगचुक ने आंदोलन के अन्य साथियों से चर्चा के बाद यह फैसला लिया है? वहीं लेखक और शिक्षाविद अपूर्वानंद ने भी कहा कि अब सरकार की बजाय विपक्ष पर जिम्मेदारी डालना कई सवाल खड़े करता है। फिलहाल, सोनम वांगचुक की नई शर्तों और आंदोलन की आगे की दिशा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं लगातार जारी हैं।
