Fasting Health Tips: व्रत के दौरान क्यों होती है कब्ज की समस्या? जानें कारण और राहत पाने के आसान घरेलू उपाय
Lifestyle Desk: व्रत के दौरान खानपान और दिनचर्या में बदलाव होना सामान्य बात है। कई लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं, जबकि कुछ लोग फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। हालांकि, इस दौरान कई लोगों को कब्ज, पेट फूलना और मल त्याग में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसकी मुख्य वजह शरीर में पानी की कमी, फाइबर का कम सेवन और शारीरिक गतिविधि में कमी हो सकती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतों को अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।

व्रत के दौरान कब्ज क्यों होती है?
- पर्याप्त पानी न पीना
उपवास के दौरान कई लोग पानी कम पीते हैं या लंबे समय तक तरल पदार्थ नहीं लेते। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और मल सख्त हो सकता है, जिससे कब्ज की समस्या बढ़ जाती है।
- फाइबर की कमी
रोजमर्रा के भोजन में मिलने वाला फाइबर व्रत के दौरान अक्सर कम हो जाता है। दाल, साबुत अनाज और हरी सब्जियों की जगह सीमित खाद्य पदार्थ लेने से पाचन प्रभावित हो सकता है।
- भोजन के समय में बदलाव
खाने का समय बदलने से शरीर की पाचन प्रक्रिया और आंतों की नियमित गतिविधि प्रभावित हो सकती है, जिससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।
- कम शारीरिक गतिविधि
कमजोरी या थकान के कारण कई लोग व्रत में अधिक आराम करते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने से भी पाचन तंत्र की गति धीमी पड़ सकती है।
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- तला-भुना भोजन अधिक खाना
साबूदाना वड़ा, चिप्स और तली हुई चीजों का अधिक सेवन तथा फल-सब्जियों की कमी भी कब्ज का कारण बन सकती है।
व्रत में कब्ज से राहत पाने के आसान उपाय
पर्याप्त पानी पिएं
यदि आपके व्रत में पानी पीना अनुमत है, तो दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें। निर्जला व्रत रखने वाले लोग व्रत शुरू होने से पहले और समाप्त होने के बाद पर्याप्त पानी जरूर लें।
फाइबर युक्त फल खाएं
अमरूद, पपीता, नाशपाती और सेब जैसे फलों में फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
संतुलित व्रत आहार लें
सिर्फ आलू और साबूदाना पर निर्भर रहने के बजाय मेवे, कुट्टू, सिंघाड़ा और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को भी आहार में शामिल करें।
हल्की वॉक या योग करें
यदि स्वास्थ्य अनुमति देता है, तो भोजन के बाद कुछ देर टहलना या हल्के योगासन करना पाचन क्रिया को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है।
मल त्याग की आदत नियमित रखें
शौच की इच्छा को लंबे समय तक न रोकें। रोजाना एक निश्चित समय पर शौचालय जाने की आदत बनाने से कब्ज की समस्या कम हो सकती है।
क्या दूध और दही कब्ज दूर करते हैं?
दूध और दही हर व्यक्ति पर एक जैसा प्रभाव नहीं डालते। कुछ लोगों को दही में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया से फायदा मिल सकता है, जबकि कुछ लोगों को दूध से गैस या पेट फूलने की शिकायत हो सकती है। इसलिए केवल दूध या दही को कब्ज का इलाज नहीं माना जा सकता।
कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
अगर कब्ज कई दिनों तक बनी रहे, बार-बार हो या घरेलू उपायों से राहत न मिले, तो डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा यदि तेज पेट दर्द, उल्टी, मल में खून, अत्यधिक पेट फूलना या गैस और मल का पूरी तरह बंद हो जाना जैसी समस्या हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
ध्यान रखें
व्रत के दौरान पर्याप्त पानी, संतुलित आहार, फाइबर युक्त भोजन और नियमित दिनचर्या अपनाकर कब्ज जैसी समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
