Crude Oil Price: 7 हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावट, क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? जानिए भारत पर कितना पड़ेगा असर
Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद और होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के सामान्य होने की संभावनाओं के बीच इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात सामान्य बने रहते हैं तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और नरमी आ सकती है।

7 हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावट
इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले सात हफ्तों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। वहीं WTI Crude Oil भी 9 फीसदी से अधिक टूट गया, जो छह सप्ताह की सबसे बड़ी गिरावट है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 1.66 डॉलर गिरकर 92.05 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि WTI क्रूड 87.36 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।
क्यों गिर रही हैं तेल की कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने तथा पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद बढ़ने से बाजार में राहत का माहौल बना है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की संभावना ने भी निवेशकों की चिंताओं को कम किया है। दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में स्थिरता आने से वैश्विक सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद बढ़ी है।
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भारत के लिए राहत की खबर
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है और अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से देश को बड़ा फायदा मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे रहती हैं तो:
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम होगा।
- एलपीजी सब्सिडी का बोझ घट सकता है।
- महंगाई दर में राहत मिल सकती है।
- तेल कंपनियों के घाटे में कमी आएगी।
- सरकार के राजकोषीय दबाव में कमी होगी।
क्या पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता?
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल कटौती की संभावना कम मानी जा रही है। तेल कंपनियां पहले अपने नुकसान की भरपाई कर सकती हैं। इसके बाद कीमतों में राहत देखने को मिल सकती है।
आगे कैसी रहेगी चाल?
वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि तेल बाजार अभी भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर कोई बाधा आती है या पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो कीमतें दोबारा तेजी से बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर अमेरिका से बढ़ती सप्लाई और चीन की कमजोर मांग फिलहाल तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद कर रही है।
निवेशकों और उपभोक्ताओं की नजरें बाजार पर
कच्चे तेल की कीमतों में आई यह गिरावट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। अब निवेशकों, तेल कंपनियों और आम उपभोक्ताओं की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है।
