55% दिव्यांगता के बावजूद नहीं टूटा हौसला: ‘वासु राइडर’ साइकिल से कर रहे 16,000 KM+ की देश यात्रा, दे रहे ‘स्टॉप पॉल्यूशन’ का संदेश
Divyang Cyclist: शारीरिक चुनौतियां यदि मजबूत इरादों के सामने टिक नहीं पातीं, तो इसकी जीवंत मिसाल उत्तर प्रदेश के आगरा निवासी वासु राइडर हैं। हाथ और पैरों में 55 प्रतिशत दिव्यांगता होने के बावजूद वासु पूरे देश में साइकिल यात्रा कर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का संदेश दे रहे हैं। उनका अभियान “Mission Stop Pollution & Save Earth” लोगों को प्रदूषण कम करने और पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित कर रहा है।

16,000 किलोमीटर से ज्यादा का सफर पूरा
वासु ने 2 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित दुर्गा नगर (राजपुर चुंगी) से तिरंगा लेकर अपनी यात्रा शुरू की थी। तब से अब तक वे 16,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश सहित उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों का भ्रमण किया। इस उपलब्धि के साथ वे उत्तर प्रदेश के सभी जिलों की साइकिल यात्रा करने वाले देश के दूसरे नागरिक बन गए हैं।
अब छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में फैलाएंगे जागरूकता
देशव्यापी अभियान के अगले चरण में वासु गौरेला-पेंड्रा-मरवाही पहुंचे हैं। यहां से उन्होंने छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाने का संकल्प लिया है। इस चरण के बाद वे अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हुए कोरबा की ओर रवाना होंगे।
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स्कूलों और युवाओं को कर रहे जागरूक
अपनी यात्रा के दौरान वासु विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों, पुलिस लाइन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहुंचकर लोगों को प्रदूषण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने जी.बी. नगर के जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपने अभियान के लिए समर्थन और शुभकामनाएं भी प्राप्त कीं।
युवाओं से की खास अपील
मीडिया से बातचीत में वासु ने कहा कि आज कम उम्र के बच्चे और युवा छोटी-छोटी दूरी के लिए भी पेट्रोल-डीजल वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जहां संभव हो, वहां पैदल चलें या साइकिल का उपयोग करें, ताकि ईंधन की खपत कम हो और पर्यावरण सुरक्षित रहे।
2028 तक जारी रहेगा अभियान
वासु राइडर की यह देशव्यापी यात्रा वर्ष 2028 तक जारी रहेगी। उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति छोटे-छोटे बदलाव अपनाए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित वातावरण तैयार किया जा सकता है। उनका साहस और समर्पण यह साबित करता है कि मजबूत इच्छाशक्ति के आगे कोई भी शारीरिक बाधा बड़ी नहीं होती।
