UPI Charges News: क्या UPI पर लगेगा चार्ज? सरकार MDR शुल्क पर कर रही विचार, जानें किसे करना होगा भुगतान
UPI Charges News: अगर आप रोजमर्रा के भुगतान के लिए UPI (Unified Payments Interface) का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) दोबारा लागू करने पर विचार कर रही है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक इसका असर आम उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि बड़े व्यापारियों पर पड़ सकता है।

क्या है MDR शुल्क?
MDR (Merchant Discount Rate) वह शुल्क होता है, जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता को देता है। वर्ष 2020 में सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए UPI लेनदेन पर MDR शुल्क समाप्त कर दिया था।
क्यों फिर से लग सकता है MDR?
रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंकों और फिनटेक कंपनियों को करोड़ों UPI ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने में भारी खर्च उठाना पड़ता है। सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी में कमी के बाद Payments Council of India और संसदीय समिति ने बड़े व्यापारियों पर MDR शुल्क लागू करने का सुझाव दिया है।
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किन व्यापारियों पर लगेगा चार्ज?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार—
- 1 से 1.5 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाले व्यापारियों पर शुल्क लागू हो सकता है।
- ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जा सकता है।
- 90% छोटे और मध्यम व्यापारियों को इस दायरे से बाहर रखा जाएगा।
क्या आम ग्राहकों को देना होगा कोई शुल्क?
रिपोर्ट्स के मुताबिक आम UPI यूजर्स को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। ग्राहक पहले की तरह PhonePe, Google Pay, Paytm, BHIM और अन्य UPI ऐप्स के जरिए मुफ्त डिजिटल भुगतान कर सकेंगे।
डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े व्यापारियों पर सीमित MDR लागू होने से बैंकों और पेमेंट कंपनियों को सिस्टम बनाए रखने में मदद मिलेगी। वहीं छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पहले की तरह मुफ्त रहने की संभावना है।
नोट: फिलहाल UPI पर MDR शुल्क लागू करने को लेकर सरकार की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।
