Shardiya Navratri Day 4 2026: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना, जानें महत्व और शुभ समय
Shardiya Navratri Day 4 2026: शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन 14 अक्टूबर 2026, बुधवार को मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाएगी। । मान्यता है कि मां कूष्मांडा की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है।

मां कूष्मांडा पूजा का महत्व
मां कूष्मांडा को ऊर्जा, सृजन और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां कूष्मांडा सूर्यलोक में निवास करती हैं और उनका तेज सूर्य के समान है।नवरात्रि के चौथे दिन मां की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच प्राप्त होती है। भक्त इस दिन विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
मां कूष्मांडा की पूजा में शुभ रंग
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा में पीला रंग शुभ माना जाता है। पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा, प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक है।
मां कूष्मांडा पूजा के शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के चौथे दिन पूजा के लिए शुभ समय का विशेष महत्व माना जाता है।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:54 बजे से 05:43 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:22 बजे से 03:09 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 04:14 बजे से शाम 05:57 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:17 बजे से 06:42 बजे तक
मां कूष्मांडा के प्रिय मंत्र
पूजा के दौरान मां कूष्मांडा के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।
मां कूष्मांडा का मंत्र:
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
मां कूष्मांडा का बीज मंत्र:
ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः
मां कूष्मांडा स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की आराधना और मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवरात्रि के चौथे दिन भक्त मां से सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजा करते हैं।
Disclaimer: इस लेख में दी गई धार्मिक मान्यताएं और जानकारी विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य केवल जानकारी और जागरूकता प्रदान करना है। किसी भी पूजा विधि, मुहूर्त या धार्मिक उपाय को अपनाने से पहले अपनी श्रद्धा और मान्यताओं के अनुसार निर्णय लें
