Featuredछत्तीसगढ़

Caste Certificate Rules: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार तहसीलदार के पास नहीं, SDO होंगे सक्षम प्राधिकारी

Caste Certificate Rules: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि तहसीलदार अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य के प्रचलित कानून और शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार सामान्यतः अनुविभागीय अधिकारी (SDO-राजस्व) ही जाति प्रमाण पत्र जारी करने के अधिकृत अधिकारी हैं।

Caste Certificate Rules

यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ ने बिलासपुर निवासी शैली सोनकर द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता शैली सोनकर ने जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बिलासपुर तहसीलदार कार्यालय में आवेदन किया था। आवेदन पर कार्रवाई शुरू होने के बावजूद लंबे समय तक न तो कोई अंतिम निर्णय लिया गया और न ही प्रमाण पत्र जारी किया गया। इससे परेशान होकर उन्होंने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

राज्य सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता ने सक्षम प्राधिकारी के बजाय तहसीलदार के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। राज्य सरकार के नियमों के अनुसार कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर, उप-कलेक्टर और अनुविभागीय अधिकारी (SDO-राजस्व) ही जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत हैं।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग अधिनियम, 2013 तथा 24 सितंबर 2013 को जारी राज्य शासन के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है और आवेदन केवल सक्षम प्राधिकारी के समक्ष ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केवल तहसीलदार के समक्ष आवेदन लंबित होने के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।

नया आवेदन करने की मिली अनुमति

हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित SDO (राजस्व) के समक्ष नया आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी। साथ ही निर्देश दिया कि यदि आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुरूप शीघ्र निर्णय लें। यह फैसला राज्यभर में जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *