Brain Chip: चीन ने लॉन्च की दुनिया की पहली कमर्शियल ब्रेन-चिप NEO, Neuralink को छोड़ा पीछे
Brain Chip Technology: ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) टेक्नोलॉजी की वैश्विक दौड़ में चीन ने बड़ा कदम उठाते हुए दुनिया की पहली कमर्शियली उपलब्ध ब्रेन-चिप NEO को लॉन्च कर दिया है। इस उपलब्धि के साथ चीन ने एलन मस्क की कंपनी Neuralink को कड़ी चुनौती दी है, जिसे अभी तक व्यावसायिक उपयोग के लिए पूर्ण नियामकीय मंजूरी नहीं मिली है।

बीजिंग की सिंघुआ यूनिवर्सिटी और शंघाई स्थित न्यूराकल टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित NEO ब्रेन-चिप को सफल क्लिनिकल परीक्षणों के बाद मंजूरी मिली है। यह डिवाइस लकवा (Paralysis) और स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से जूझ रहे मरीजों को फिर से अपने शरीर के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण पाने में मदद कर सकती है।
क्या है NEO ब्रेन-चिप?
NEO एक सिक्के के आकार का ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) इम्प्लांट है, जिसे खोपड़ी और मस्तिष्क के बीच स्थापित किया जाता है। यह दिमाग से निकलने वाले न्यूरल सिग्नल्स को कैप्चर कर उन्हें डिजिटल कमांड में बदलता है, जिससे कंप्यूटर, डिवाइस या अन्य तकनीकी सिस्टम को नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक भविष्य में न्यूरोलॉजिकल रोगों के इलाज और विकलांग व्यक्तियों की जिंदगी आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
Neuralink और NEO में क्या अंतर है?
जहां एलन मस्क की Neuralink का N1 इम्प्लांट सीधे मस्तिष्क के सेरेब्रल कॉर्टेक्स में इलेक्ट्रोड स्थापित करता है, वहीं NEO को अपेक्षाकृत कम इनवेसिव तरीके से डिजाइन किया गया है। NEO में आठ सेंसर ड्यूरा मेटर के पास लगाए जाते हैं, जिससे सर्जरी का जोखिम कम होता है और मरीजों के लिए प्रक्रिया अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। यही कारण है कि कई विशेषज्ञ NEO को कम जोखिम वाला विकल्प मान रहे हैं।
36 मरीजों पर सफल परीक्षण
रिपोर्ट्स के अनुसार NEO ब्रेन-चिप का परीक्षण 36 मरीजों पर किया गया है और इसके परिणाम सकारात्मक रहे हैं। फिलहाल 11 लोगों पर इसका क्लिनिकल उपयोग जारी है। दूसरी ओर Neuralink का N1 इम्प्लांट अभी 9 मरीजों पर परीक्षण चरण में है।
यह भी पढ़ें: Women’s T20 World Cup 2026: दीप्ति शर्मा ने पाकिस्तान के खिलाफ 5 विकेट लेकर रचा इतिहास
किन बीमारियों में मिल सकती है मदद?
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक का उपयोग कई गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं:
- लकवा (Paralysis)
- स्पाइनल कॉर्ड इंजरी
- पार्किंसन रोग
- मिर्गी (Epilepsy)
- स्ट्रोक
- डिप्रेशन
- बोलने और चलने-फिरने में असमर्थता
प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
हालांकि इस तकनीक ने चिकित्सा क्षेत्र में नई उम्मीदें जगाई हैं, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंताएं भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी डिवाइस संवेदनशील न्यूरल डेटा को स्टोर करेंगी, जिससे डेटा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
भविष्य की तकनीक की ओर बड़ा कदम
ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस को भविष्य की सबसे क्रांतिकारी तकनीकों में गिना जा रहा है। चीन की NEO ब्रेन-चिप को इस दिशा में बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। यदि इसके परिणाम लंबे समय तक सफल रहते हैं, तो यह तकनीक लाखों मरीजों की जिंदगी बदल सकती है और मानव-मशीन इंटरफेस के नए युग की शुरुआत कर सकती है।
