RBI Repo Rate Hike: कार और होम लोन की EMI होगी महंगी RBI ने 44 महीने बाद Repo Rate बढ़ाया, जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर
Business Desk: देशभर के करोड़ों लोनधारकों के लिए अहम खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने करीब 44 महीने बाद रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत (25 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है।

RBI के इस फैसले का सीधा असर होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले बैंक लोन पर पड़ेगा। आने वाले समय में बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने पर लोन की EMI महंगी हो सकती है।
44 महीने बाद बढ़ा Repo Rate
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति (Monetary Policy) की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और बढ़ते महंगाई दबाव को देखते हुए पॉलिसी रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही रेपो रेट अब 5.50 प्रतिशत हो गया है। करीब साढ़े तीन साल (44 महीने) बाद केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में वृद्धि की है।
Repo Rate क्या होती है?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए पैसा उधार देता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाता है। इसका असर ग्राहकों पर पड़ता है और बैंक धीरे-धीरे होम लोन, कार लोन और अन्य कर्जों की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।
होम और कार लोन पर क्या होगा असर?
यदि आपका लोन फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट पर है, तो आने वाले महीनों में आपकी EMI बढ़ सकती है। बैंक चाहें तो: EMI बढ़ा सकते हैं। या फिर EMI समान रखते हुए लोन की अवधि (Tenure) बढ़ा सकते हैं। हालांकि, अंतिम फैसला संबंधित बैंक की ब्याज दर संशोधन नीति पर निर्भर करेगा।
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों को मिल सकता है फायदा
रेपो रेट बढ़ने का फायदा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले निवेशकों को भी मिल सकता है। यदि बैंक जमा दरों में बढ़ोतरी करते हैं, तो नई FD पर पहले की तुलना में अधिक ब्याज मिलने की संभावना रहेगी।
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RBI ने यह फैसला क्यों लिया?
RBI के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते महंगाई दबाव को देखते हुए मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना जरूरी है। इसी उद्देश्य से केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति को थोड़ा सख्त करते हुए रेपो रेट बढ़ाने का निर्णय लिया है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
- होम लोन की EMI बढ़ सकती है।
- कार लोन महंगा हो सकता है।
- पर्सनल और बिजनेस लोन की ब्याज दरें भी बढ़ सकती हैं।
- नए लोन लेने वालों को अधिक ब्याज देना पड़ सकता है।
- FD निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
