Heat Powered Cooling System: बिना बिजली और मोटर के होगी कूलिंग, रिसर्चर्स ने बनाया गर्मी से चलने वाला अनोखा सिस्टम
Heat Powered Cooling System: गर्मी से राहत पाने के लिए अब तक एयर कंडीशनर और दूसरे कूलिंग सिस्टम बिजली पर निर्भर रहे हैं। लेकिन भविष्य में ऐसा कूलिंग सिस्टम संभव हो सकता है, जो बिजली या इलेक्ट्रिक मोटर के बिना सिर्फ गर्मी और सौर ऊर्जा की मदद से ठंडक पैदा करे। जर्मनी के Karlsruhe Institute of Technology (KIT) और जापान की University of Tsukuba के रिसर्चर्स ने एक ऐसा इलास्टोकैलोरिक सॉलिड-स्टेट कूलिंग सिस्टम विकसित किया है, जो वेस्ट हीट और सूरज की गर्मी को कूलिंग में बदलने की क्षमता दिखाता है।

बिना मोटर के कैसे काम करता है यह कूलिंग सिस्टम?
इस नई तकनीक में निकेल और टाइटेनियम से बनी बेहद पतली शेप-मेमोरी अलॉय फिल्म का इस्तेमाल किया गया है। गर्म और ठंडा होने पर ये फिल्में अपना आकार बदलती हैं। रिसर्चर्स ने शेप-मेमोरी अलॉय के दो अलग-अलग गुणों को एक ही सिस्टम में जोड़ा है। एक फिल्म गर्मी को मैकेनिकल काम में बदलती है, जबकि दूसरी फिल्म इस काम को कूलिंग इफेक्ट में बदल देती है। इस प्रक्रिया की खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक कंप्रेसर या इलेक्ट्रिक मोटर की जरूरत नहीं पड़ती।
वेस्ट हीट और सूरज की रोशनी से मिलेगी ठंडक
रिसर्चर्स के मुताबिक, यह तकनीक कूलिंग के लिए एक नया रास्ता खोल सकती है, जिसमें बेकार गर्मी और सौर ऊर्जा जैसे उपलब्ध ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसका फायदा खासतौर पर उन जगहों पर हो सकता है जहां कूलिंग के लिए लगातार बिजली उपलब्ध कराना मुश्किल या महंगा होता है।
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86°C गर्मी में 13°C तक ठंडा हुआ मटीरियल
प्रोटोटाइप के शुरुआती परीक्षण में इसे करीब 86°C की गर्मी देकर चलाया गया। इस दौरान सिस्टम के अंदर मौजूद कूलिंग मटीरियल का तापमान करीब 13°C तक कम हुआ, जबकि पूरे सिस्टम के तापमान में लगभग 4°C की कमी दर्ज की गई। टेस्ट के दौरान यह सिस्टम 130°C तक की बाहरी गर्मी में भी काम करने में सक्षम रहा।
कूलिंग की दुनिया में क्यों खास है यह टेक्नोलॉजी?
दुनिया में ऊर्जा की खपत का एक बड़ा हिस्सा हीटिंग और कूलिंग में जाता है। वहीं, पारंपरिक कूलिंग सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले रेफ्रिजरेंट पर्यावरण पर भी असर डाल सकते हैं। ऐसे में सॉलिड-स्टेट कूलिंग जैसी तकनीक भविष्य में कम ऊर्जा खपत और अधिक पर्यावरण-अनुकूल कूलिंग सिस्टम विकसित करने में मदद कर सकती है।
कंप्यूटर चिप्स और इलेक्ट्रिक गाड़ियों में हो सकता है इस्तेमाल
फिलहाल यह सिस्टम एक प्रोटोटाइप है और रिसर्चर्स इसकी कूलिंग क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इसके लिए कई धातु की फिल्मों को एक साथ जोड़ने की दिशा में रिसर्च की जा रही है।
भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटर चिप्स को ठंडा करने में किया जा सकता है। खास बात यह होगी कि चिप से निकलने वाली वेस्ट हीट को ही कूलिंग प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इसी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों में ड्राइवट्रेन से निकलने वाली गर्मी का दोबारा इस्तेमाल करके इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सिस्टम को ठंडा करने की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं।
भविष्य की कूलिंग टेक्नोलॉजी बन सकती है यह सिस्टम
गर्मी से पैदा होने वाली ऊर्जा को ही ठंडक में बदलने का यह तरीका अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसकी तकनीक कूलिंग सिस्टम के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अगर रिसर्चर्स इसकी क्षमता और स्केल को बढ़ाने में सफल होते हैं, तो आने वाले समय में वेस्ट हीट और सौर ऊर्जा से चलने वाले कूलिंग सिस्टम पारंपरिक बिजली आधारित कूलिंग का एक विकल्प बन सकते हैं।
