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RTE Admission 2026: आरटीई एडमिशन पर हाईकोर्ट सख्त, 387 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं आने पर जताई नाराजगी

RTE Admission 2026: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत कक्षा पहली में प्रवेश प्रक्रिया की धीमी रफ्तार को लेकर राज्य सरकार पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सरकार से शपथ पत्र के जरिए विस्तृत जानकारी मांगी है कि किस स्कूल में कितनी सीटें उपलब्ध थीं और किन बच्चों को प्रवेश दिया गया है।

RTE Admission 2026

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रदेश के 387 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं आना गंभीर चिंता का विषय है। वहीं 366 ऐसे स्कूल भी हैं, जहां सीटों की तुलना में आवेदन बेहद कम प्राप्त हुए हैं। इन स्कूलों में प्रदेश के कई बड़े और प्रतिष्ठित निजी स्कूल शामिल बताए जा रहे हैं।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा पूरा ब्यौरा

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य सरकार सभी स्कूलों का विस्तृत डेटा प्रस्तुत करे। इसमें यह जानकारी शामिल होगी कि किस स्कूल में कितनी सीटें आरक्षित थीं, कितने आवेदन आए और कितने बच्चों को प्रवेश मिला।

कोर्ट ने यह भी पूछा कि आखिर बड़े स्कूलों में गरीब और जरूरतमंद बच्चों के आवेदन क्यों नहीं पहुंच रहे हैं। न्यायालय ने आशंका जताई कि या तो जागरूकता की कमी है या फिर सरकार पूरी जानकारी सामने नहीं ला रही है।

ऑनलाइन सीट आबंटन पर भी जोर

हाईकोर्ट ने आरटीई सीटों के आबंटन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट का मानना है कि इससे अभिभावकों को सही जानकारी मिलेगी और प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

10 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित की गई है। तब तक राज्य सरकार को सभी जरूरी आंकड़े और जानकारी कोर्ट में पेश करनी होगी। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद प्रदेश में आरटीई एडमिशन प्रक्रिया को लेकर नई गाइडलाइन और सख्ती देखने को मिल सकती है।

आरटीई एडमिशन क्यों है महत्वपूर्ण?

शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहती हैं। इसका उद्देश्य गरीब बच्चों को भी बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है। लेकिन इस बार बड़ी संख्या में स्कूलों में आवेदन नहीं आने से पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी निगाहें टिक गई हैं।

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