H-1B Visa News: भारतीयों को बड़ी राहत, अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप की $100,000 फीस को किया रद्द
Washington/New Delhi: अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी अदालत ने H-1B वीजा आवेदनों पर प्रस्तावित 1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) की अतिरिक्त फीस को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। यह शुल्क पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की नीति के तहत प्रस्तावित किया गया था।

अदालत के इस फैसले का अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय और टेक सेक्टर से जुड़े संगठनों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे H-1B वीजा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और विदेशी पेशेवरों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
अदालत ने क्यों रद्द किया फैसला?
अमेरिकी जिला जज Leo T. Sorokin ने अपने 42 पन्नों के फैसले में कहा कि H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर का शुल्क वास्तव में एक नया टैक्स था, जिसे लागू करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक थी।
जज ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के अनुसार टैक्स लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है। राष्ट्रपति या प्रशासन बिना कानूनी अनुमति के इस तरह का नया शुल्क नहीं लगा सकते। उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन मामलों में राष्ट्रपति के पास व्यापक अधिकार होते हैं, लेकिन वे संवैधानिक सीमाओं और कांग्रेस द्वारा निर्धारित कानूनों से ऊपर नहीं हैं।
यह भी पढ़ें: iOS 27 Developer Beta डाउनलोड कैसे करें? जानें स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस
ट्रंप प्रशासन की दलील क्यों हुई खारिज?
ट्रंप प्रशासन ने अदालत में तर्क दिया था कि यह अतिरिक्त शुल्क इमिग्रेशन नियंत्रण और विदेशी नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की नीति का हिस्सा है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि किसी टैक्स को प्रतिबंध का नाम देकर वैध नहीं बनाया जा सकता। जज ने माना कि यह नीति कानूनी अधिकारों से परे जाकर लागू की गई थी और आवश्यक नियामक प्रक्रियाओं का भी पालन नहीं किया गया।
भारतीय पेशेवरों को कैसे मिलेगा फायदा?
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय आईटी इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, डेटा साइंटिस्ट, हेल्थकेयर विशेषज्ञ और रिसर्च प्रोफेशनल H-1B वीजा के जरिए काम करते हैं। यदि 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस लागू हो जाती, तो कई कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना बेहद महंगा हो जाता। इससे भारतीय पेशेवरों के अवसर भी प्रभावित हो सकते थे। अदालत के फैसले से फिलहाल ऐसी आशंकाओं पर विराम लग गया है।
क्या है H-1B वीजा?
H-1B अमेरिका का एक अस्थायी (Non-Immigrant) कार्य वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कुशल पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है।
H-1B वीजा की मुख्य विशेषताएं
- अमेरिकी नियोक्ता (Employer) का स्पॉन्सर होना जरूरी
- विशेष कौशल वाली नौकरी के लिए उपयोग
- आमतौर पर 3 वर्ष की वैधता
- अधिकतम 6 वर्ष तक विस्तार संभव
- हर साल सीमित संख्या में वीजा जारी
- चयन के लिए लॉटरी सिस्टम का उपयोग
भारतीयों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है H-1B?
भारत H-1B वीजा प्राप्त करने वाले देशों में सबसे आगे है। विशेष रूप से आईटी कंपनियों के हजारों कर्मचारी हर साल इस वीजा के माध्यम से अमेरिका में रोजगार प्राप्त करते हैं। इस फैसले के बाद भारतीय पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों दोनों को राहत मिली है, क्योंकि H-1B वीजा प्रक्रिया पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
क्या होगा आगे?
अदालत ने इस नीति को पूरे देश में अमान्य घोषित कर दिया है। फिलहाल H-1B वीजा आवेदकों को 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी। हालांकि भविष्य में इस मुद्दे पर कानूनी या राजनीतिक स्तर पर नई बहस देखने को मिल सकती है।
