Chhattisgarh Government: लोक सेवा गारंटी कानून के दायरे में आईं श्रम विभाग की कई सेवाएं, राजपत्र में अधिसूचना जारी
Chhattisgarh Government: छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने श्रमिकों और आम नागरिकों को समयबद्ध एवं पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 के तहत श्रम विभाग की विभिन्न सेवाओं को अधिसूचित करते हुए उन्हें लोक सेवा गारंटी कानून के दायरे में शामिल कर लिया है। इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

समय-सीमा के भीतर मिलेगी श्रम विभाग की सेवाएं
जारी अधिसूचना के अनुसार श्रम विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं के लिए निर्धारित समय-सीमा तय कर दी गई है। साथ ही प्रत्येक सेवा के लिए पदाभिहित अधिकारी, सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी भी निर्धारित किए गए हैं, ताकि आवेदकों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रमिकों और नागरिकों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी का सामना न करना पड़े और वे तय समय के भीतर आवश्यक सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
सेवाओं में देरी होने पर अपील का अधिकार
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी आवेदक को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो उसे संबंधित प्रावधानों के तहत अपील करने का अधिकार होगा। इससे विभागीय जवाबदेही बढ़ेगी और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी।
यह भी पढ़ें: Chhattisgarh News: हाथियों के संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती वन मंत्री केदार कश्यप ने..
पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन को मिलेगा बढ़ावा
राज्य शासन का मानना है कि इस कदम से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। श्रम विभाग से जुड़े कार्यों में अनावश्यक विलंब कम होगा और लोगों को कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
श्रमिकों को मिलेगा सीधा लाभ
लोक सेवा गारंटी कानून के दायरे में सेवाओं के आने से श्रमिकों को विभिन्न प्रमाणपत्र, पंजीयन, अनुमतियां और अन्य विभागीय सेवाएं तय समय में प्राप्त हो सकेंगी। इससे श्रम विभाग की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनेगी।
अधिकारियों को दिए गए आवश्यक निर्देश
राज्य शासन ने संबंधित अधिकारियों को अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि सभी अधिसूचित सेवाओं का लाभ नागरिकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर मिले और शिकायतों का त्वरित निराकरण हो सके।यह फैसला राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
