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CG Land Use Rules: कृषि जमीन पर बड़े मॉल से लेकर आवासीय क्षेत्र में गोदाम तक पर रोक! छत्तीसगढ़ में बदलने वाले हैं भूमि उपयोग के नियम

CG Land Use Rules 2026: छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। राज्य सरकार ने भूमि विकास नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें अलग-अलग Land Use Category के हिसाब से प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची तय की गई है।

CG Land Use Rules

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद और कृषि भूमि के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी ये प्रस्तावित नियम हैं और अंतिम नियम नहीं हैं। ड्राफ्ट पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 23 सितंबर 2026 तक आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं।

आवासीय जमीन पर गोदाम और कबाड़खाने पर रोक का प्रस्ताव

प्रस्तावित नियमों में आवासीय क्षेत्र में कई तरह की गतिविधियों को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। आवासीय भूमि पर हरित, नारंगी, लाल और नीली श्रेणी के उद्योगों के अलावा गोदाम, कबाड़खाना, बूचड़खाना, संक्रामक रोग अस्पताल और जेल जैसी गतिविधियों पर रोक प्रस्तावित है।

इसके अलावा बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण और गैस स्टोरेज जैसी गतिविधियां भी आवासीय क्षेत्र में प्रतिबंधित हो सकती हैं। पशुपालन, मछली पालन, डेयरी, पोल्ट्री फार्म, दाह संस्कार स्थल, कब्रिस्तान और खनन गतिविधियों को भी इस श्रेणी में प्रतिबंधित रखने का प्रस्ताव है।

व्यावसायिक जमीन पर भी कई गतिविधियां होंगी प्रतिबंधित

Commercial Land Use के लिए भी कई प्रतिबंध प्रस्तावित किए गए हैं। व्यावसायिक भूमि पर नारंगी, लाल और नीली श्रेणी के उद्योग नहीं किए जा सकेंगे।

इसके अलावा खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों का भंडारण भी प्रतिबंधित रहेगा। पशु एवं मछली पालन, डेयरी, पोल्ट्री, दाह संस्कार स्थल, कब्रिस्तान और खनन गतिविधियों पर भी रोक का प्रस्ताव है।

औद्योगिक जमीन पर नहीं बन सकेगी सामान्य Residential Township

प्रस्तावित नियमों में Industrial Land Use के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। औद्योगिक भूमि पर कर्मचारी आवास और डॉरमेट्री को छोड़कर सामान्य Residential Township विकसित करने की अनुमति नहीं देने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य औद्योगिक और आवासीय गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना बताया गया है।

Public और Semi-Public Land पर भी नए प्रतिबंध

सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक भूमि के इस्तेमाल को लेकर भी कुछ गतिविधियों पर रोक प्रस्तावित है। इस श्रेणी की जमीन पर कर्मचारी आवास को छोड़कर टाउनशिप, पोल्ट्री और गोदाम जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी।

Transport Land पर Residential Settlement पर रोक

परिवहन उपयोग के लिए निर्धारित जमीन पर भी आवासीय बस्तियां विकसित करने का प्रस्ताव नहीं है। इसके अलावा खतरनाक रसायनों का भंडारण, असंगत व्यावसायिक गतिविधियां और नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योग भी प्रतिबंधित रहेंगे।

मनोरंजन क्षेत्र में भी नहीं चल सकेंगी कई गतिविधियां

आमोद-प्रमोद या Recreational Land Use के तहत आने वाली जमीन पर आवासीय बस्तियां और सभी तरह के उद्योग प्रतिबंधित रखने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही व्यावसायिक परिसर, प्रदूषणकारी गतिविधियां, खनन, डेयरी तथा दाह संस्कार और कब्रिस्तान जैसी गतिविधियों पर भी रोक प्रस्तावित की गई है।

कृषि जमीन पर बड़े मॉल पर रोक का प्रस्ताव

प्रस्तावित बदलावों में Agricultural Land को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान है। कृषि भूमि पर अफोर्डेबल हाउसिंग और इंटीग्रेटेड टाउनशिप को छोड़कर बड़े मॉल विकसित करने पर रोक का प्रस्ताव किया गया है। इस प्रावधान का असर उन विकास गतिविधियों पर पड़ सकता है, जिनमें कृषि भूमि को बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

23 सितंबर तक दे सकते हैं आपत्ति और सुझाव

सरकार की ओर से तैयार किया गया यह अभी एक Draft Proposal है। इसलिए प्रस्तावित प्रतिबंधों को अंतिम नियम नहीं माना जा सकता। ड्राफ्ट पर संबंधित पक्षों, नागरिकों और अन्य हितधारकों से 23 सितंबर 2026 तक आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों के बाद नियमों में बदलाव संभव है।

मुख्यमंत्री ने नियमों को सरल बनाने पर दिया जोर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार, राज्य सरकार का प्रयास नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। सरकार का उद्देश्य बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों, निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति देना है।

मंत्री ओपी चौधरी ने क्या कहा?

मंत्री ओपी चौधरी के अनुसार, सरकार भूमि उपयोग से जुड़े नियमन को अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनके मुताबिक, बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए नियमों में संशोधन जरूरी है।

अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ

छत्तीसगढ़ में Land Use Rules में प्रस्तावित बदलाव को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ड्राफ्ट अभी अंतिम नियम नहीं बना है। इसलिए कृषि, आवासीय, व्यावसायिक या अन्य श्रेणी की जमीन पर प्रस्तावित प्रतिबंधों को फिलहाल ड्राफ्ट के रूप में ही देखा जाना चाहिए। 23 सितंबर तक प्राप्त आपत्ति और सुझावों के बाद सरकार की ओर से अंतिम नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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