Meta Lawsuit: Meta पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा मुकदमा, हार हुई तो बदल सकता है Instagram और Facebook का तरीका
Meta Lawsuit: Facebook और Instagram की पैरेंट कंपनी Meta के खिलाफ बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका में चल रही कानूनी लड़ाई अब बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गई है। कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित संघीय अदालत में इस सप्ताह Meta के खिलाफ एक हाई-प्रोफाइल ट्रायल में दलीलें शुरू हो रही हैं। मामले में 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल शामिल हैं, जबकि शुरुआती ट्रायल में कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी वादी के तौर पर शामिल हैं।

मामले में आरोप है कि Meta ने Facebook और Instagram में ऐसे फीचर्स डिजाइन किए, जिनसे बच्चे और किशोर प्लेटफॉर्म पर अधिक समय बिताने के लिए प्रेरित होते हैं। इसके साथ ही कंपनी पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा माता-पिता की अनुमति के बिना इकट्ठा करने का भी आरोप लगाया गया है। Meta ने इन आरोपों से इनकार किया है।
क्यों अहम है Meta के खिलाफ यह मुकदमा?
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सिर्फ आर्थिक नुकसान की बात नहीं है, बल्कि Instagram और Facebook के संचालन और डिजाइन में बदलाव की भी मांग की जा रही है। राज्य सरकारें Meta के प्लेटफॉर्म पर उम्र संबंधी प्रतिबंध, बच्चों के डेटा से जुड़े एल्गोरिदम और AI मॉडल हटाने, Infinite Scroll जैसी सुविधाओं में बदलाव और युवाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले उपायों की मांग कर रही हैं। अगर अदालत इन मांगों को स्वीकार करती है, तो इसका असर केवल Meta पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों के पूरे बिजनेस मॉडल और प्लेटफॉर्म डिजाइन पर पड़ सकता है।
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Meta पर क्या हैं आरोप?
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि Meta ने जानबूझकर ऐसे सिस्टम और फीचर्स विकसित किए, जिनका उद्देश्य बच्चों और किशोरों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखना था। इसके अलावा 29 राज्यों के मामले में कंपनी पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों के डेटा को बिना माता-पिता की सहमति के इकट्ठा और इस्तेमाल करने का आरोप है। यह दावा अमेरिकी संघीय कानून के उल्लंघन से जुड़ा है। मामले में राज्य सरकारों का कहना है कि Meta को अपने प्लेटफॉर्म के संभावित प्रभावों की जानकारी थी, फिर भी उसने युवाओं को प्लेटफॉर्म पर अधिक समय तक बनाए रखने वाले फीचर्स पर काम जारी रखा।
1.4 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा कितना बड़ा है?
Meta ने अदालत में दाखिल दस्तावेजों में संभावित नुकसान की अधिकतम राशि करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना का उल्लेख किया है। यह रकम कंपनी के लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर के बाजार पूंजीकरण के करीब है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत Meta पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर का जुर्माना लगाने जा रही है। राज्यों ने सार्वजनिक रूप से इतनी रकम की मांग तय नहीं की है और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इतनी बड़ी राशि का वास्तविक जुर्माना लगना बेहद असंभव माना जा रहा है। अदालत के पास अंतिम नुकसान या जुर्माने की राशि तय करने का अधिकार होगा।
Meta ने आरोपों पर क्या कहा?
Meta ने इन आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं और माता-पिता, विशेषज्ञों तथा कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ काम किया है। कंपनी का कहना है कि ट्रायल के दौरान पेश किए जाने वाले सबूत युवाओं की सुरक्षा को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को दिखाएंगे।
Meta के लिए पहले भी आए हैं झटके
यह मुकदमा ऐसे समय शुरू हो रहा है जब Meta को युवाओं से जुड़े कई अन्य मामलों में कानूनी झटके मिल चुके हैं। इस साल अमेरिका में कम से कम दो अहम मामलों में अदालतों या ज्यूरी के फैसले कंपनी के खिलाफ गए हैं। न्यू मैक्सिको में एक मामले में Meta के खिलाफ आर्थिक दंड और प्लेटफॉर्म में सुरक्षा बदलाव का आदेश दिया गया। इसके अलावा लॉस एंजिल्स में एक मामले में भी Meta के खिलाफ फैसला आया। Meta ने इन मामलों में अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को व्यापक रूप से खारिज किया है और कुछ फैसलों के खिलाफ अपील की प्रक्रिया भी अपनाई है।
क्या हमेशा के लिए बदल जाएगा Instagram और Facebook?
अगर अदालत राज्य सरकारों के उन सुधार संबंधी अनुरोधों को स्वीकार करती है, तो Instagram और Facebook के काम करने के तरीके में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। संभावित बदलावों में उम्र की सख्त जांच, Infinite Scroll पर प्रतिबंध या बदलाव, बच्चों के डेटा से तैयार एल्गोरिदम और AI मॉडल को हटाना, नोटिफिकेशन में बदलाव और Engagement की जगह Well-being को प्राथमिकता देने वाले सिस्टम शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इनमें से कितने बदलाव लागू होंगे। ट्रायल के बाद अदालत का अंतिम फैसला ही यह तय करेगा कि Meta को किन कानूनी और तकनीकी बदलावों का सामना करना पड़ेगा।
इस केस में ज्यूरी की भूमिका भी खास है
इस मुकदमे में एक Advisory Jury भी बैठाई गई है। इसका फैसला बाध्यकारी नहीं होगा और अंतिम निर्णय जज Yvonne Gonzalez Rogers का होगा। ट्रायल कई सप्ताह चलने की उम्मीद है। इस वजह से मामला केवल संभावित अरबों-खरबों डॉलर के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका में सोशल मीडिया और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े भविष्य के नियमों के लिए भी बड़ा कानूनी परीक्षण माना जा रहा है।
