Surya Grahan 2026: 12 अगस्त को लगेगा साल का आखिरी और दुर्लभ सूर्य ग्रहण, 7 घंटे 21 मिनट तक रहेगा राहु-केतु का प्रभाव
Surya Grahan 2026: वर्ष 2026 का अंतिम और बेहद दुर्लभ सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने जा रहा है। धार्मिक, ज्योतिषीय और खगोलीय दृष्टि से यह ग्रहण विशेष महत्व रखता है। इस बार ग्रहण की अवधि करीब 7 घंटे 21 मिनट रहेगी, जो इसे वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं में शामिल करती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण के दौरान राहु-केतु का प्रभाव बना रहेगा और कई दुर्लभ योगों का निर्माण होगा।

कब लगेगा सूर्य ग्रहण 2026?
भारतीय समयानुसार यह पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 09:05 बजे शुरू होकर 13 अगस्त 2026 की सुबह 04:25 बजे समाप्त होगा। ग्रहण सावन माह की अमावस्या तिथि पर लगेगा और इसकी कुल अवधि 7 घंटे 21 मिनट होगी। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में इसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा।
कहां दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण?
खगोलविदों के अनुसार साल का अंतिम सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से:
- यूरोप
- उत्तरी अमेरिका
- ग्रीनलैंड
- आर्कटिक क्षेत्र
- उत्तरी गोलार्ध के कई देशों
में दिखाई देगा। भारत में इसकी दृश्यता नहीं होने के कारण सामान्य धार्मिक गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।
ग्रहण के दौरान बनेगा दुर्लभ चतुर्ग्रही योग
इस सूर्य ग्रहण के समय कर्क राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध और बृहस्पति की युति होगी। चार ग्रहों की एक साथ उपस्थिति से चतुर्ग्रही योग का निर्माण होगा, जिसे ज्योतिष में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि इस योग का प्रभाव ग्रहण समाप्त होने के बाद भी कई महीनों तक देखने को मिल सकता है।
नवपंचम योग का भी बनेगा संयोग
12 अगस्त 2026 के सूर्य ग्रहण के दौरान नवपंचम योग का भी निर्माण होगा। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण के साथ नवपंचम योग का बनना मिश्रित परिणाम देने वाला माना जाता है। कुछ राशियों के लिए यह योग चुनौतियां लेकर आ सकता है, जबकि कुछ राशियों को करियर, धन और प्रतिष्ठा में लाभ मिलने की संभावना है।
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इन राशियों के लिए शुभ माना जा रहा ग्रहण
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह सूर्य ग्रहण विशेष रूप से:
- मिथुन राशि
- कन्या राशि
- मीन राशि
के जातकों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। इन राशि वालों को नौकरी, व्यापार, निवेश और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
7 घंटे से ज्यादा रहेगा राहु-केतु का प्रभाव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण का संबंध राहु और केतु से माना जाता है। ग्रहण की पूरी अवधि के दौरान सूर्य पर राहु-केतु का प्रभाव रहेगा। इसी कारण इसे ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।
क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?
सूर्य ग्रहण का सूतक काल सामान्यतः ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाता।चूंकि 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में सूतक काल मान्य नहीं होगा और पूजा-पाठ सहित अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।
क्यों खास है Surya Grahan 2026?
- साल 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण
- पूर्ण सूर्य ग्रहण की खगोलीय घटना
- 7 घंटे 21 मिनट की लंबी अवधि
- कर्क राशि में चतुर्ग्रही योग
- नवपंचम योग का दुर्लभ संयोग
- राहु-केतु का प्रभाव पूरे ग्रहण काल तक
- यूरोप और उत्तरी अमेरिका में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा
