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Google Trademark Case: गूगल पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, Zoho फाउंडर श्रीधर वेम्बु बोले- “जो गूगल कर रहा था, वह पूरी तरह अनैतिक था”

Google Trademark Case: दिल्ली हाई कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद टेक जगत में नई बहस छिड़ गई है। सैनिटरीवेयर ब्रांड Hindware से जुड़े ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में कोर्ट ने Google को दोषी ठहराते हुए कंपनी को 30 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद Zoho के संस्थापक Sridhar Vembu ने गूगल की विज्ञापन नीति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और Nithin Kamath के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं।

Google Trademark Case


श्रीधर वेम्बु ने गूगल पर साधा निशाना

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीधर वेम्बु ने कहा कि गूगल जिस तरह दूसरे ब्रांड के ट्रेडमार्क का इस्तेमाल विज्ञापन कारोबार में कर रहा था, वह पूरी तरह से अनैतिक था। उन्होंने कहा कि भारत में इस तरह की गतिविधियों को गैरकानूनी घोषित किया जाना सही कदम है और कंपनियों को ऐसे मामलों में जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

मामला तब सामने आया जब Hindware ने आरोप लगाया कि गूगल अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर अन्य कंपनियों को “HINDWARE” जैसे पंजीकृत ट्रेडमार्क को कीवर्ड के रूप में खरीदकर विज्ञापन चलाने की अनुमति दे रहा था। इससे ग्राहकों में भ्रम की स्थिति बन रही थी और ब्रांड की पहचान को नुकसान पहुंच रहा था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद माना कि “HINDWARE” कोई सामान्य शब्द नहीं बल्कि एक विशिष्ट और पंजीकृत ट्रेडमार्क है। ऐसे में इसके नाम का व्यावसायिक उपयोग बिना अनुमति करना ट्रेडमार्क अधिकारों का उल्लंघन है।

कोर्ट ने गूगल को क्या आदेश दिया?

कोर्ट ने गूगल को निर्देश दिया कि वह भविष्य में HINDWARE और उससे मिलते-जुलते ट्रेडमार्क को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में उपयोग करने की अनुमति न दे। साथ ही कंपनी को Hindware को 30 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश भी दिया गया।

टेक इंडस्ट्री में बढ़ी बहस

इस फैसले के बाद डिजिटल विज्ञापन मॉडल, ट्रेडमार्क सुरक्षा और बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऑनलाइन विज्ञापन और ब्रांड संरक्षण से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

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