Rupee vs Dollar: डॉलर और यूरो से भी आगे निकला रुपया! सर्कुलेशन में भारतीय करेंसी का बड़ा आंकड़ा
Rupee vs Dollar: अमेरिकी डॉलर को दुनिया की सबसे ताकतवर और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली करेंसी माना जाता है। ग्लोबल ट्रेड से लेकर रिजर्व करेंसी तक डॉलर का दबदबा कायम है। लेकिन अगर बात सर्कुलेशन में मौजूद बैंकनोटों की संख्या की करें, तो भारतीय रुपया डॉलर और यूरो दोनों से आगे है।

RBI के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू के मुताबिक, भारत में चलन में मौजूद रुपये के बैंकनोटों की संख्या अमेरिकी डॉलर के नोटों की तुलना में करीब तीन गुना और यूरो बैंकनोटों की तुलना में करीब छह गुना है।
भारत में कितने रुपये के नोट चलन में हैं?
मुर्मू के अनुसार, भारत में इस समय करीब 176 अरब बैंकनोट चलन में हैं। इसकी तुलना में पिछले साल के अंत तक करीब 56 अरब अमेरिकी डॉलर के नोट और लगभग 30 अरब यूरो के नोट सर्कुलेशन में थे। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि केवल नोटों की संख्या से किसी करेंसी की ताकत या आर्थिक मूल्य तय नहीं होता। अलग-अलग देशों में बैंकनोट के मूल्यवर्ग, अर्थव्यवस्था का आकार, महंगाई और नकदी इस्तेमाल करने की आदत अलग होती है। भारत में कम मूल्यवर्ग वाले नोटों की संख्या ज्यादा होने के कारण समान आर्थिक लेनदेन के लिए दूसरे देशों की तुलना में अधिक नोटों की जरूरत पड़ सकती है।
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7 अगस्त 2026 तक भारत में कितने बैंकनोट?
RBI के आंकड़ों के मुताबिक 7 अगस्त 2026 तक अलग-अलग मूल्यवर्ग के बैंकनोटों की स्थिति इस प्रकार रही:
| मूल्यवर्ग | मात्रा (करोड़ नोट) | कुल मूल्य (₹ करोड़) |
|---|---|---|
| ₹2 और ₹5 | 1,10,185 | 4,230 |
| ₹10 | 2,82,148 | 28,215 |
| ₹20 | 1,43,165 | 28,633 |
| ₹50 | 1,10,323 | 55,161 |
| ₹100 | 2,80,206 | 2,80,206 |
| ₹200 | 1,06,688 | 2,13,377 |
| ₹500 | 7,25,577 | 36,28,775 |
| ₹2000 | 265 | 5,298 |
| कुल | 17,58,735 | 42,43,896 |
इन आंकड़ों से पता चलता है कि संख्या के मामले में ₹500 के नोटों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। वहीं कुल मूल्य के लिहाज से भी ₹500 के नोटों का योगदान सबसे ज्यादा है।
हर साल अरबों नोट छापता है RBI
RBI के डिप्टी गवर्नर के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में भारत हर साल अलग-अलग मूल्यवर्ग के करीब 28 से 30 अरब बैंकनोट छाप रहा है। वहीं लगभग 21 अरब नोट हर साल सर्कुलेशन से हटाए जाते हैं। इतनी बड़ी संख्या में नोटों की छपाई, वितरण, वापसी और नष्ट करने की पूरी प्रक्रिया एक बड़े लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के जरिए संचालित होती है।
डिजिटल पेमेंट बढ़ा, फिर भी कैश की मांग जारी
भारत में UPI और अन्य डिजिटल पेमेंट माध्यमों के तेजी से बढ़ने के बावजूद नकदी की मांग खत्म नहीं हुई है। बल्कि करेंसी इन सर्कुलेशन लगातार बढ़ रही है। मुर्मू ने इसे “Cash Paradox” बताया। यानी एक तरफ डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ रहा है और दूसरी तरफ सर्कुलेशन में मौजूद नकदी की मात्रा भी बढ़ रही है। इसका मतलब है कि लोग छोटे-बड़े कई तरह के लेनदेन के लिए डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था में कैश की जरूरत अभी भी बनी हुई है।
RBI कैसे पहुंचाता है लोगों तक करेंसी?
RBI देशभर में अपने 19 क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ-साथ कमर्शियल और कोऑपरेटिव बैंकों तथा सरकारी ट्रेजरी के करेंसी चेस्ट नेटवर्क के जरिए नोटों का प्रबंधन और वितरण करता है।
इसके बाद बैंकनोट आम लोगों तक कई माध्यमों से पहुंचते हैं, जिनमें:
- बैंक शाखाएं
- 2.5 लाख से ज्यादा ATM
- Cash Dispensers
- ग्रामीण और छोटे शहरों में Business Correspondents
- बैंकों का करेंसी वितरण नेटवर्क
शामिल हैं।
नोटों की संख्या ज्यादा होना क्या रुपये को डॉलर से ताकतवर बनाता है?
यहां Rupee vs Dollar को समझना जरूरी है। भारत में नोटों की संख्या ज्यादा होने का मतलब यह नहीं है कि रुपया डॉलर से ज्यादा मजबूत या ज्यादा मूल्यवान हो गया है। Banknote Circulation और Currency Strength दो अलग-अलग चीजें हैं। डॉलर का अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेशी मुद्रा भंडार और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है। वहीं भारत में कम मूल्यवर्ग के नोटों के बड़े इस्तेमाल के कारण सर्कुलेशन में नोटों की संख्या काफी ज्यादा हो सकती है। इसलिए RBI के आंकड़े मुख्य रूप से यह बताते हैं कि भारत की नकदी अर्थव्यवस्था का पैमाना कितना बड़ा है, न कि रुपया डॉलर से ज्यादा ताकतवर है।
RBI नोटों की उम्र बढ़ाने पर भी कर रहा काम
RBI बैंकनोट की लागत को नियंत्रित करने और उनकी उम्र बढ़ाने के लिए नए विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इसके तहत पॉलीमर जैसे विकल्पों के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है, ताकि नोट ज्यादा टिकाऊ हो सकें और उन्हें बार-बार बदलने की जरूरत कम पड़े।
