Meta Fine: Meta पर ₹5000 करोड़ का जुर्माना COPPA कानून के तहत कोर्ट का बड़ा फैसला, फेसबुक-इंस्टाग्राम पर लगे गंभीर आरोप
Meta Fine: फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta को अमेरिका में बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यू मैक्सिको की अदालत ने कंपनी पर 567 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब ₹5000 करोड़) का जुर्माना लगाया है। अदालत ने माना कि Meta के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे थे और कंपनी ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े नियमों का पर्याप्त पालन नहीं किया।

यह फैसला उस मुकदमे के दूसरे चरण में आया है, जिसमें Meta पहले ही दोषी ठहराई जा चुकी थी।
COPPA कानून के तहत सुनाया गया फैसला
अदालत ने अपने फैसले में Children’s Online Privacy Protection Act (COPPA) का हवाला दिया। यह अमेरिकी कानून 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। कोर्ट के अनुसार, Meta बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करने और उनकी व्यक्तिगत जानकारी के उपयोग से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन नहीं कर पाई।
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युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च होगी बड़ी राशि
अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि का बड़ा हिस्सा बच्चों और युवाओं के हित में खर्च किया जाएगा।
- 420 मिलियन डॉलर मानसिक स्वास्थ्य उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किए जाएंगे।
- शेष राशि अगले पांच वर्षों में जागरूकता अभियान, रोकथाम कार्यक्रम, स्क्रीनिंग सेवाओं और अन्य सुरक्षा उपायों पर खर्च होगी।
पहले भी लगाया जा चुका है जुर्माना
इस मामले के पहले चरण में भी Meta पर 375 मिलियन डॉलर का सिविल जुर्माना लगाया गया था। अदालत ने उस समय माना था कि कंपनी को पहले से जानकारी थी कि उसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, बच्चों से जुड़े यौन शोषण संबंधी कुछ जानकारियों को लेकर भी कंपनी पर सवाल उठाए गए थे।
Meta में बड़े बदलाव की मांग
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत से Meta के प्लेटफॉर्म में कई बड़े बदलाव लागू करने की मांग की।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- बच्चों के लिए बेहतर Age Verification सिस्टम
- लत बढ़ाने वाले फीचर्स पर नियंत्रण
- डिफॉल्ट प्राइवेसी सेटिंग्स को अधिक सुरक्षित बनाना
- बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की निगरानी को मजबूत करना
- नाबालिग यूजर्स की सुरक्षा के लिए सख्त तकनीकी उपाय लागू करना
अदालत ने Meta के पक्ष में भी कही यह बात
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि केवल Meta पर ही उम्र सत्यापन (Age Verification) लागू किया जाता है और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों पर समान नियम लागू नहीं होते, तो यह प्रतिस्पर्धा के लिहाज से Meta के साथ अनुचित होगा। इसलिए अदालत ने संकेत दिया कि डिजिटल सुरक्षा से जुड़े नियम सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ी वैश्विक बहस
Meta पर लगाए गए इस भारी जुर्माने के बाद एक बार फिर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, सोशल मीडिया की जिम्मेदारी और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर वैश्विक बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए और अधिक सख्त नियमों का पालन करना पड़ सकता है।
