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H-1B Visa: ट्रंप ने बढ़ाई $1 लाख फीस की अवधि, भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या होगा असर?

H-1B Visa News, Washington: अमेरिका में काम करने की तैयारी कर रहे विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर भारतीय IT कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा प्रोग्राम पर निगरानी और सख्त कर दी है। 18 सितंबर 2026 को जारी नई Presidential Proclamation के तहत कुछ H-1B मामलों में लागू $100,000 फीस की शर्त को अगले 12 महीनों के लिए बढ़ाया गया है। यह प्रावधान 21 सितंबर 2026 से प्रभावी होकर सितंबर 2027 तक जारी रहने वाला है, जब तक इसे आगे नहीं बढ़ाया जाता।

H-1B Visa

इसी दिन जारी एक Executive Order में H-1B applications की जांच और inter-agency coordination बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। खासतौर पर उन employers के मामलों में अतिरिक्त scrutiny की बात कही गई है, जिन्होंने हाल में या भविष्य में समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है।

$1 लाख H-1B फीस की अवधि एक साल बढ़ी

White House के मुताबिक, 2025 में लागू की गई $100,000 payment requirement को नए Proclamation के जरिए अतिरिक्त 12 महीनों के लिए renew किया गया है। यह restriction उन H-1B specialty occupation workers की entry से जुड़ा है जो फिलहाल अमेरिका के बाहर हैं और जिनकी petition के साथ निर्धारित payment नहीं की गई है। हालांकि, इसमें राष्ट्रीय हित के आधार पर exception का प्रावधान भी रखा गया है।

इसका मतलब यह है कि हर H-1B worker या हर तरह के H-1B case पर समान तरीके से $100,000 payment लागू होने की बात नहीं कही गई है। मामले की स्थिति, worker की location और लागू exceptions महत्वपूर्ण होंगे।

H-1B पर निगरानी क्यों बढ़ाई गई?

18 सितंबर के Executive Order में अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया कि कुछ employers, third-party placement groups और outsourcing firms H-1B program का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। White House का कहना है कि कुछ मामलों में कम वेतन वाले विदेशी workers का इस्तेमाल अमेरिकी workers को replace करने के लिए किया गया।

Executive Order में H-1B program के कथित misuse को wages, employment opportunities और program integrity से जोड़ते हुए agencies को अधिक coordination के निर्देश दिए गए हैं।

वेतन और अमेरिकी नौकरियों को लेकर क्या दावा किया गया?

White House के Executive Order में दावा किया गया है कि H-1B workers और comparable U.S.-born workers के बीच कुछ H-1B-dependent industries में $9,000 से $20,000 तक का wage gap देखा गया है। यह प्रशासन द्वारा प्रस्तुत दावा है और इसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

आदेश में यह भी कहा गया है कि Fiscal Year 2026 में outsourcing business model के साथ काम करने वाले छह बड़े H-1B users ने 25,000 से अधिक H-1B cap registrations किए थे।

Outsourcing कंपनियों पर बढ़ेगी नजर

नई policy में खासतौर पर IT staffing और outsourcing companies पर नजर बढ़ाने की बात सामने आई है। प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियां H-1B workers को third-party client companies में अमेरिकी employees की जगह इस्तेमाल करती हैं और बाद में काम को विदेशों में transfer कर देती हैं।

White House ने कुछ H-1B-dependent outsourcing firms से जुड़े visa fraud और अन्य कथित गैरकानूनी गतिविधियों की जांच का भी उल्लेख किया है।

कंपनियों की layoffs भी होंगी जांच

Executive Order का एक महत्वपूर्ण हिस्सा employers की layoffs से जुड़ा है। अब संबंधित agencies को H-1B applications, labor condition applications और petitions की समीक्षा करते समय यह देखना होगा कि sponsoring employer ने पिछले एक साल में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या नहीं।

अगर कंपनी भविष्य में ऐसी layoffs की योजना बना रही है, जिससे similarly situated U.S. workers प्रभावित हो सकते हैं, तो इसे भी consideration में लिया जाएगा।

इसके अलावा, Labor Department के Wage and Hour Division को 30 दिनों के भीतर पहले से जमा Labor Condition Applications के data की review शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

कई सरकारी एजेंसियां साझा करेंगी डेटा

नई व्यवस्था के तहत Department of State, Department of Labor और Department of Homeland Security को Department of Commerce, Department of Education और Small Business Administration के साथ coordination करने का निर्देश दिया गया है।

इन agencies के बीच wages, employment, education, industry और economic conditions से जुड़ी relevant information साझा की जा सकेगी, ताकि H-1B applications और petitions की जांच ज्यादा coordinated तरीके से की जा सके।

भारतीय IT Professionals पर क्या असर होगा?

भारत H-1B program का एक प्रमुख beneficiary रहा है, इसलिए इस policy change का असर भारतीय IT professionals और अमेरिका में hiring करने वाली Indian-origin तथा global technology companies के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

नए H-1B applicants के लिए: अमेरिकी employer को sponsorship और hiring decision लेते समय बढ़ी हुई scrutiny और संभावित $100,000 payment requirement को ध्यान में रखना होगा, खासकर उन cases में जहां worker अमेरिका से बाहर है।

IT और outsourcing sector के लिए: जिन कंपनियों के business model में H-1B workers और third-party placements की बड़ी भूमिका है, उन्हें layoffs, wages और employment practices को लेकर अधिक scrutiny का सामना करना पड़ सकता है।

मौजूदा H-1B holders के लिए: नई proclamation की language मुख्य रूप से उन H-1B workers की entry को address करती है जो अमेरिका से बाहर हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर existing H-1B holder पर स्वतः $100,000 payment लागू हो गई है। लागू नियम case-specific हैं और proclamation में exceptions भी मौजूद हैं।

क्या है H-1B Visa Program?

H-1B एक U.S. nonimmigrant visa category है, जिसके जरिए अमेरिकी employers specialty occupations में qualified foreign workers को नियुक्त कर सकते हैं। Technology, engineering, finance और अन्य specialized fields में इसका व्यापक इस्तेमाल होता है।

भारतीय IT professionals के लिए H-1B लंबे समय से अमेरिका में skilled employment का एक महत्वपूर्ण रास्ता रहा है। नई policy के बाद employers के लिए compliance, wages, layoffs और hiring practices की जांच पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

आगे क्या होगा?

18 सितंबर 2026 के Executive Order और Proclamation के बाद H-1B program की scrutiny बढ़ने की दिशा स्पष्ट हुई है। $100,000 payment requirement को सितंबर 2027 तक बढ़ाया गया है, जबकि Executive Order agencies को employers और applications की ज्यादा विस्तृत जांच के निर्देश देता है।

इस policy के कानूनी पहलुओं को लेकर अदालतों में चुनौती भी जारी है। इसलिए H-1B applicants और employers के लिए किसी भी आवेदन या hiring decision से पहले लागू नियमों और आधिकारिक guidance की स्थिति देखना महत्वपूर्ण रहेगा।

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