E100 Ethanol Cars: 100% एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों के लिए ईंधन कहां से आएगा? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
E100 Ethanol Cars: भारत में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में E100 यानी 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को मंजूरी दी गई है। हालांकि, अब इस नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अहम सवाल पूछा है।

शीर्ष अदालत ने केंद्र से पूछा है कि अगर देश में बड़ी संख्या में 100% एथेनॉल आधारित गाड़ियों को अनुमति दी जाती है, तो उनके लिए जरूरी एथेनॉल ईंधन की पर्याप्त मात्रा कहां से आएगी और इसकी सप्लाई व्यवस्था किस तरह तैयार की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने एथेनॉल सप्लाई पर उठाए सवाल
एथेनॉल वितरण से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने इस मुद्दे पर चिंता जताई।
अदालत ने कहा कि एथेनॉल आधारित वाहनों की नीति केवल वाहन और ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध:
- पर्यावरण संरक्षण,
- आम उपभोक्ताओं के हित,
- किसानों की आय,
- और देश की ऊर्जा सुरक्षा
से भी जुड़ा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि एथेनॉल नीति का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचना चाहिए।
सरकार ने बताया एथेनॉल सप्लाई बढ़ाने का प्लान
केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि देश में एथेनॉल उत्पादन और सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ इसके स्टोरेज और वितरण सिस्टम को भी बेहतर किया जा रहा है। अगली सुनवाई में सरकार किसानों के हित और एथेनॉल नीति से जुड़े आर्थिक पहलुओं की जानकारी भी अदालत को देगी।
क्या होता है E100 और E85 ईंधन?
एथेनॉल पेट्रोल का एक जैविक विकल्प है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।
- E85 ईंधन: इसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है।
- E100 ईंधन: इसमें पूरी तरह 100 प्रतिशत एथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है।
E100 वाहनों का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर देश की निर्भरता कम करना और कार्बन उत्सर्जन घटाना है।
भारत में अभी 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग पर फोकस
जहां सरकार E100 वाहनों को बढ़ावा दे रही है, वहीं पेट्रोलियम मंत्रालय ने संकेत दिया है कि फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20 Blending) के मौजूदा लक्ष्य को तुरंत बढ़ाने की योजना नहीं है। भारत में E20 पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा चुका है और इसका उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर आयात खर्च कम करना है।
एथेनॉल सप्लाई को लेकर क्यों है चिंता?
100 प्रतिशत एथेनॉल वाहनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराना है।
अगर भविष्य में बड़ी संख्या में E100 वाहन सड़क पर आते हैं, तो सरकार को इन चीजों पर ध्यान देना होगा:
- पर्याप्त एथेनॉल उत्पादन क्षमता,
- देशभर में ईंधन वितरण नेटवर्क,
- स्टोरेज सुविधा,
- किसानों से कच्चे माल की स्थिर खरीद,
- एथेनॉल की कीमत और उपलब्धता।
विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन तकनीक के साथ-साथ ईंधन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना भी जरूरी होगा।
एथेनॉल नीति में किसानों की भूमिका अहम
एथेनॉल उत्पादन में किसानों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से बनने वाले एथेनॉल से किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात पर जोर दिया है कि नीति का फायदा वास्तविक रूप से किसानों तक पहुंचना चाहिए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
एथेनॉल सप्लाई मामले में अगली सुनवाई नवंबर में
एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 से जुड़े विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई नवंबर महीने में होगी। इस मामले में अदालत यह देखेगी कि केंद्र सरकार एथेनॉल उत्पादन, ईंधन उपलब्धता, किसानों के हित और देश की ऊर्जा नीति के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।
