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Maa Mahishasur Mardini Temple: 18 भुजाओं वाली अद्भुत प्रतिमा और रहस्यमयी शंकर गुफा

Maa Mahishasur Mardini Temple: शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला भक्ति में डूबा हुआ है। यहां स्थित चैतुरगढ़ का प्राकृतिक किला और मां महिषासुर मर्दिनी का मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। यह धाम ‘लाफागढ़’ के नाम से भी प्रसिद्ध है और नवरात्रि में यहां हजारों की संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

18 भुजाओं वाली अद्भुत प्रतिमा

चैतुरगढ़ पहाड़ी पर स्थित मंदिर में मां महिषासुर मर्दिनी की अठारह भुजाओं वाली भव्य प्रतिमा स्थापित है। मान्यता है कि माता के दर्शन मात्र से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस वर्ष नवरात्रि पर यहां करीब 25 हजार मनोकामना ज्योत प्रज्वलित की गईं, जो भक्तों की गहरी आस्था को दर्शाती हैं।

चैतुरगढ़ का ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व

यह किला कोरबा से लगभग 100 किलोमीटर और पाली से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतिहासकारों का मानना है कि इसका निर्माण गुप्तवंशीय राजाओं के समय हुआ था और बाद में कलचुरी शासक पृथ्वीदेव ने इसे विकसित कराया। यह किला ऊंची चट्टानों से घिरा हुआ है और इसमें तीन विशाल प्रवेश द्वार हैं – मेनका, हुमकारा और सिंहद्वार।

रहस्यमयी शंकर गुफा

मंदिर से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है 25 फीट लंबी शंकर गुफा। यह बेहद संकरी और रहस्यमयी मानी जाती है। मान्यता है कि केवल सच्चे श्रद्धालु ही इस गुफा के अंदर तक पहुंच पाते हैं।

आस्था और सेवा का संगम

नवरात्रि पर आसपास के नौ गांवों की ओर से श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भंडारा और भोग का आयोजन किया जाता है। यहां की पहाड़ियां प्राकृतिक सुंदरता और दुर्लभ पक्षियों तथा वन्यजीवों के लिए भी प्रसिद्ध हैं।

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