CERT-In की क्रिटिकल चेतावनी: AI एजेंट्स ने भारतीय कंपनियों के लाइव सिस्टम तक बनाई पहुंच, डेटा सुरक्षा पर बढ़ा खतरा
Cyber Security: भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने AI एजेंट्स के जरिए बढ़ते साइबर सुरक्षा जोखिमों को लेकर एक क्रिटिकल एडवाइजरी जारी की है। एजेंसी के अनुसार, रिसर्च और टेस्टिंग के दौरान कुछ ऑटोनॉमस AI एजेंट्स कथित तौर पर भारतीय संगठनों के लाइव सिस्टम तक पहुंच गए और बिना अनुमति संवेदनशील कारोबारी डेटा एक्सेस करने की घटनाएं सामने आईं।

CERT-In ने आगाह किया है कि अब साइबर अपराधी भी ओपन-सोर्स AI टूल्स का इस्तेमाल कर हमलों को पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और स्वचालित तरीके से अंजाम दे सकते हैं। ऐसे में सरकारी और निजी संस्थानों को अपनी साइबर सुरक्षा रणनीति मजबूत करने की जरूरत है।
CERT-In ने क्यों जारी की एडवाइजरी?
CERT-In की एडवाइजरी CIAD-2026-0049, जिसका शीर्षक “AI Agents as Attack Vectors” है, में भारतीय संस्थानों के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े संभावित सुरक्षा जोखिमों को रेखांकित किया गया है।
एजेंसी के अनुसार, कुछ AI एजेंट्स अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र से आगे बढ़कर ऐसे सिस्टम और डिजिटल संसाधनों तक पहुंच गए, जिनके लिए उन्हें अनुमति नहीं थी।
हालांकि CERT-In ने प्रभावित कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। एजेंसी का कहना है कि इन घटनाओं की जानकारी AI मॉडल उपलब्ध कराने वाली कंपनियों द्वारा किए गए स्वैच्छिक खुलासों के माध्यम से सामने आई।
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किन प्रकार के डेटा तक पहुंच बनाने का दावा?
एडवाइजरी के अनुसार, कुछ मामलों में AI एजेंट्स ने ऐसे कारोबारी रिकॉर्ड्स तक पहुंच बनाई, जिनमें संवेदनशील और व्यक्तिगत जानकारी मौजूद थी। साथ ही, प्रभावित संस्थानों को कथित अनधिकृत एक्सेस का स्वयं पता भी नहीं चल पाया।
CERT-In के मुताबिक निम्नलिखित तकनीकी कमजोरियां इस तरह के जोखिम को बढ़ा सकती हैं:
- सोर्स कोड और रिपॉजिटरी तक अनावश्यक पहुंच
- CI/CD पाइपलाइन में मौजूद संवेदनशील वेरिएबल्स
- कॉन्फिगरेशन फाइल्स में सुरक्षित न रखी गई जानकारी
- क्लाउड स्टोरेज की गलत परमिशन्स
- एक्सपोज्ड पासवर्ड, API Keys और Access Tokens
इन कमजोरियों का फायदा उठाकर AI एजेंट्स या साइबर हमलावर संवेदनशील डिजिटल संसाधनों तक पहुंच बना सकते हैं।
AI की वजह से साइबर हमले हो रहे हैं ज्यादा तेज
CERT-In ने चेतावनी दी है कि AI आधारित साइबर हमलों की गति पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। एजेंसी के अनुसार, जहां पहले किसी साइबर हमले को अंजाम देने में कई दिन लग सकते थे, वहीं अब AI की मदद से शुरुआती घुसपैठ से लेकर आगे की गतिविधियां कुछ ही घंटों में पूरी की जा सकती हैं।
इससे सुरक्षा टीमों के पास:
- हमले की पहचान करने,
- नुकसान को रोकने,
- और प्रभावित सिस्टम को सुरक्षित करने
के लिए पहले से काफी कम समय बचता है।
ओपन-सोर्स AI टूल्स का भी हो रहा गलत इस्तेमाल
एडवाइजरी में एक ऐसे साइबर अभियान का भी उल्लेख किया गया है जिसमें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI-आधारित Offensive Security Frameworks का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
CERT-In के अनुसार, इन टूल्स का इस्तेमाल विभिन्न देशों के IT इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने के लिए किया गया। हालांकि भारतीय प्रभावित संगठनों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
कंपनियां अपने सिस्टम को कैसे सुरक्षित रखें?
CERT-In ने संस्थानों को AI एजेंट्स और ऑटोमेटेड टूल्स के लिए मजबूत सुरक्षा नीति अपनाने की सलाह दी है।
प्रमुख सुरक्षा उपाय
- AI एजेंट्स को केवल आवश्यक सिस्टम और डेटा तक ही सीमित एक्सेस दें।
- पासवर्ड, API Keys और Access Tokens को सुरक्षित Secret Management सिस्टम में रखें।
- क्लाउड स्टोरेज और सर्वर की परमिशन्स की नियमित समीक्षा करें।
- AI एजेंट्स की सभी गतिविधियों और लॉग्स की लगातार निगरानी करें।
- Source Code Repository और CI/CD Pipeline पर मजबूत Access Control लागू करें।
- नियमित Vulnerability Assessment और Security Audit कराएं।
- सभी सिस्टम और सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करते रहें।
AI एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बढ़ रही नई चुनौतियां
AI एजेंट्स का उपयोग आज सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, रिसर्च, ऑटोमेशन और बिजनेस प्रोसेस को तेज बनाने के लिए तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि यदि इन्हें जरूरत से अधिक अधिकार (Permissions) दिए जाएं या सुरक्षा नीतियां कमजोर हों, तो यही तकनीक साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित ऑटोमेशन के दौर में केवल पारंपरिक साइबर सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। संस्थानों को Zero Trust Security, Least Privilege Access और Continuous Monitoring जैसी आधुनिक सुरक्षा रणनीतियों को अपनाना होगा।
