FASTag New Rules 2026: दिव्यांगजनों को बड़ी राहत, अब 3 या 5 साल तक वैध रहेगा Exempted FASTag
FASTag New Rules 2026: केंद्र सरकार ने दिव्यांगजनों और दिव्यांग श्रेणी के पात्र वाहन मालिकों के लिए Exempted FASTag के नियमों में बदलाव किया है। नए नियम 2 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं। अब पात्र लाभार्थियों को हर साल FASTag रिन्यू कराने की जरूरत नहीं होगी। इसकी वैधता दिव्यांगता के प्रमाणपत्र में दर्ज प्रतिशत के आधार पर तय की जाएगी।

दिव्यांगता के प्रतिशत के हिसाब से मिलेगी वैधता
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, Exempted FASTag की वैधता इस प्रकार होगी:
- 70% से 100% दिव्यांगता: FASTag 5 साल तक वैध रहेगा।
- 40% से 70% से कम दिव्यांगता: FASTag 3 साल तक वैध रहेगा।
पहले इस श्रेणी के FASTag को हर साल रिन्यू कराना पड़ता था। नए नियमों से बार-बार दस्तावेज जमा करने और नवीनीकरण की प्रक्रिया से राहत मिलेगी।
किन वाहनों को मिलेगा Exempted FASTag?
यह सुविधा निर्धारित नियमों के तहत पात्र वाहनों के लिए है। इसमें दिव्यांग व्यक्तियों के उपयोग के लिए विशेष रूप से डिजाइन और निर्मित वाहन तथा ‘Divyangjan’ श्रेणी में पंजीकृत वाहन शामिल हैं।
FASTag जारी करने के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र, Unique Disability Identity (UDID) कार्ड या अन्य मान्य सरकारी दस्तावेजों में दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत को आधार बनाया जाएगा। केवल दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर ही पात्रता तय नहीं होती; वाहन और आवेदक को संबंधित नियमों की शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
क्या FASTag की वैधता खत्म होने पर रिन्यू कराना होगा?
हां। निर्धारित 3 या 5 साल की अवधि पूरी होने के बाद FASTag का नवीनीकरण कराया जा सकता है। इसके लिए आवेदक को उस समय भी पात्रता की शर्तें पूरी करनी होंगी। राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के प्रावधान लागू रहेंगे।
क्या है Exempted FASTag?
Exempted FASTag एक विशेष RFID टैग है, जो निर्धारित नियमों के तहत टोल शुल्क से छूट प्राप्त वाहनों के लिए जारी किया जाता है। इसका उद्देश्य टोल प्लाजा पर वाहन की पहचान और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। यह सामान्य FASTag से अलग है। इसकी सुविधा केवल पात्र व्यक्तियों और वाहनों को लागू नियमों के अनुसार मिलती है।
दिव्यांग वाहन मालिकों को क्या होगा फायदा?
नए नियमों से पात्र दिव्यांग वाहन मालिकों को हर साल नवीनीकरण कराने की परेशानी से राहत मिलेगी। इससे समय और कागजी प्रक्रिया कम होगी तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल व्यवस्था अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।
