Pandeshwar Mahadev Temple: यहां है दुनिया का एकमात्र 12 मुखी शिवलिंग, महाभारत काल से जुड़ा है पांडेश्वर महादेव मंदिर
Pandeshwar Mahadev Temple: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। भारत में भगवान शिव के अनेक प्राचीन और चमत्कारी मंदिर हैं, लेकिन राजस्थान के जयपुर से करीब 85 किलोमीटर दूर स्थित पांडेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी विशेषता के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां दुनिया का एकमात्र 12 मुखी शिवलिंग स्थापित है, जिसका वजन करीब 6 टन और ऊंचाई लगभग सवा सात फीट बताई जाती है।

महाभारत काल से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
पांडेश्वर महादेव मंदिर राजस्थान के विराटनगर स्थित पंचखंड पर्वत की चोटी पर बना हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में 12 वर्ष के वनवास और अज्ञातवास के दौरान पांचों पांडवों ने यहां कुछ समय बिताया था।
कहा जाता है कि इसी दौरान उन्होंने भगवान शिव की आराधना करते हुए इस शिवलिंग की स्थापना की थी। यह मंदिर आज भी महाभारत काल की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर के रूप में जाना जाता है।
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यहीं छिपाए थे पांडवों ने अपने शस्त्र
मंदिर परिसर तीन विशाल चट्टानों से घिरा हुआ है और इसमें तीन प्रवेश द्वार हैं। मंदिर के महंतों के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने दिव्य शस्त्र इसी गुफा में छिपाए थे, ताकि उनकी पहचान उजागर न हो। इतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सम्राट अशोक ने भी इस पर्वत पर लगभग 300 दिनों तक निवास किया था।
अघोरी साधु ने वर्षों तक बंद रखी थी गुफा
मंदिर के 13वें आचार्य स्वामी सोमेंद्र महाराज के अनुसार, एक समय यहां एक अघोरी साधु भगवान शिव की साधना करते थे। जब वे यहां से गए तो उन्होंने गुफा के प्रवेश मार्ग को पत्थरों से बंद कर दिया। कई वर्षों बाद स्थानीय लोगों और मंदिर के पूर्वजों ने गुफा को दोबारा खोला और पूजा-अर्चना शुरू की। उस समय यहां छोटा शिवलिंग स्थापित था, जो समय के साथ खंडित हो गया।
वर्ष 2004 में स्थापित हुआ वर्तमान 12 मुखी शिवलिंग
खंडित शिवलिंग को विधिवत गंगा में विसर्जित करने के बाद वर्ष 2004 में पूरे वैदिक रीति-रिवाजों के साथ वर्तमान 6 टन वजनी और सवा सात फीट ऊंचा 12 मुखी शिवलिंग स्थापित किया गया। इसे दुनिया का एकमात्र 12 मुखी शिवलिंग माना जाता है और यही इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है।
सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भक्तों की भीड़
सावन के महीने और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि 12 मुखी शिवलिंग की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
आज भी साधना के लिए पहुंचते हैं संत और अघोरी
मंदिर के महंत के अनुसार, आज भी कई संत, साधु और अघोरी यहां तपस्या करने आते हैं। समय-समय पर मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान, रुद्राभिषेक और विशेष शिव पूजन का आयोजन भी किया जाता है।
क्यों खास है पांडेश्वर महादेव मंदिर?
- दुनिया का एकमात्र 12 मुखी शिवलिंग
- महाभारत काल से जुड़ा धार्मिक इतिहास
- पांडवों द्वारा शिवलिंग स्थापना की मान्यता
- अज्ञातवास में शस्त्र छिपाने का स्थल
- 6 टन वजनी और सवा सात फीट ऊंचा शिवलिंग
- सावन और महाशिवरात्रि पर विशेष धार्मिक आयोजन
सावन के पावन अवसर पर यदि आप भगवान शिव के किसी विशेष और ऐतिहासिक मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो राजस्थान का पांडेश्वर महादेव मंदिर आस्था, इतिहास और आध्यात्म का अद्भुत संगम है।
