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Kalashtami 2026: आज करें काल भैरव की विशेष साधना, संकट, भय और नकारात्मक शक्तियों से मिलेगी मुक्ति

Kalashtami 2026: ज्येष्ठ अधिक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि पर आज कालाष्टमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र और शक्तिशाली स्वरूप काल भैरव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव अपने भक्तों की हर प्रकार के भय, संकट, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करते हैं। इस वर्ष अधिक मास में पड़ने के कारण कालाष्टमी का महत्व कई गुना बढ़ गया है और इस दिन किए गए पूजा-पाठ व उपाय विशेष फलदायी माने जा रहे हैं।

Kalashtami 2026


सूर्यास्त के बाद करें काल भैरव की पूजा

ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी की पूजा का सबसे शुभ समय सूर्यास्त के बाद माना जाता है।

शुभ मुहूर्त

  • गोधूली मुहूर्त : शाम 7:16 बजे से 7:36 बजे तक
  • सायं संध्या काल : शाम 7:17 बजे से 8:18 बजे तक

इस दौरान काल भैरव की पूजा, मंत्र जाप और साधना करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

कालभैरवाष्टक का पाठ माना जाता है महाउपाय

कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए कालभैरवाष्टकम् का पाठ अत्यंत प्रभावी माना गया है। यदि यह संभव न हो तो श्रद्धा और भक्ति के साथ भैरव चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। मान्यता है कि इससे मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

कालाष्टमी पर करें ये 5 अचूक उपाय

1. काले कुत्ते को खिलाएं भोजन

धार्मिक मान्यता के अनुसार काला कुत्ता काल भैरव का वाहन माना जाता है। शाम के समय काले कुत्ते को मीठी रोटी, गुड़ या बिस्कुट खिलाने से राहु-केतु दोष शांत होते हैं और दुर्घटनाओं से रक्षा मिलती है।

2. सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं

रात्रि के समय घर के मुख्य द्वार या भैरव मंदिर में सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने लगती है।

3. कालभैरव अष्टक का पाठ करें

यदि शत्रु बाधा, कानूनी विवाद या मानसिक तनाव परेशान कर रहा हो तो काल भैरव के समक्ष बैठकर कालभैरव अष्टक का पाठ करें। इससे आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है।

4. विशेष मंत्र का 108 बार जाप करें

“ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय”

इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से जीवन के बड़े संकटों और बाधाओं को दूर करने में सहायता मिलती है।

5. सात्विकता का पालन करें

कालाष्टमी के दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। साथ ही किसी गरीब, असहाय या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करने से बचना चाहिए।

क्यों खास है अधिक मास की कालाष्टमी?

धार्मिक ग्रंथों में काल भैरव को कलियुग का जागृत देवता और काशी का कोतवाल कहा गया है। मान्यता है कि कालाष्टमी पर की गई साधना शत्रु बाधा, भय, राहु-केतु दोष और नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति दिलाने में सहायक होती है।

इस बार अधिक मास में पड़ने के कारण कालाष्टमी का महत्व और अधिक बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा कई गुना अधिक फल प्रदान कर सकती है।

काल भैरव की कृपा से मिलती है सुरक्षा और सफलता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान काल भैरव अपने भक्तों को भयमुक्त जीवन, आत्मबल, सफलता और सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसलिए कालाष्टमी का दिन साधना, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

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