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Padmini Ekadashi 2026: पुरुषोत्तमी एकादशी पर बन रहा दुर्लभ संयोग, जानिए व्रत की तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

Padmini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन अधिकमास में आने वाली पद्मिनी एकादशी, जिसे पुरुषोत्तमी एकादशी या कमला एकादशी भी कहा जाता है, अन्य सभी एकादशियों की तुलना में अधिक पुण्यदायी मानी जाती है। इस वर्ष यह पावन व्रत श्रद्धालुओं को भक्ति, साधना, आत्मशुद्धि और मनोकामना पूर्ति का दुर्लभ अवसर प्रदान करेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास में आने वाली यह एकादशी भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम है।

Padmini Ekadashi 2026


अधिकमास में बढ़ जाता है एकादशी का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। यह पूरा माह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान-पुण्य और व्रत का कई गुना फल प्राप्त होता है। इसी कारण अधिकमास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना गया है।

कब है पुरुषोत्तमी (पद्मिनी) एकादशी 2026?

पंचांग के अनुसार पद्मिनी एकादशी तिथि का प्रारंभ 27 मई 2026 को सुबह 6:22 बजे से होगा और इसका समापन 28 मई 2026 को सुबह 7:22 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर व्रत 27 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा।

एकादशी व्रत की पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें।
  • व्रत के दौरान निर्जल या फलाहार का संकल्प लें।
  • विष्णु सहस्त्रनाम, गीता पाठ और मंत्र जाप करें।
  • शाम को दीपदान और भजन-कीर्तन करें।
  • रात्रि जागरण का भी विशेष महत्व माना गया है।
  • अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।
  • ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा देकर पुण्य प्राप्त करें।

पौराणिक कथा में वर्णित है महिमा

पद्म पुराण के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। कथा के अनुसार त्रेता युग में राजा कीर्तवीर्य और उनकी रानी संतान सुख से वंचित थे। देवी अनुसूया के मार्गदर्शन में रानी ने पद्मिनी एकादशी का व्रत किया, जिसके प्रभाव से उन्हें कार्तवीर्य अर्जुन जैसे पराक्रमी पुत्र की प्राप्ति हुई। इसी कारण यह व्रत संतान सुख, सुख-समृद्धि और जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।

जप-तप का मिलता है कई गुना फल

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इस दिन किया गया जप, तप और पूजा स्थान के अनुसार कई गुना फल प्रदान करता है। घर, मंदिर, तीर्थ स्थल और गौशाला में किए गए धार्मिक कार्यों का पुण्य क्रमशः बढ़ता जाता है। इसलिए श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की आराधना में विशेष समय व्यतीत करते हैं।

क्या है पद्मिनी एकादशी का महत्व?

पद्मिनी एकादशी को आत्मिक उन्नति, पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और पारिवारिक शांति प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

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