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Mango Farming: सोने से भी महंगा ‘आम’, 3 लाख रुपये किलो तक कीमत! ओडिशा के किसान की अनोखी खेती देखने उमड़ रही भीड़

Mango Farming: खेती में नई तकनीक और दुर्लभ फसलों के प्रयोग किसानों की किस्मत बदल सकते हैं। इसका ताजा उदाहरण ओडिशा के मलकानगिरी जिले के किसान देबा पधियामी हैं, जिन्होंने अपने बगीचे में दुनिया के सबसे महंगे आमों में शुमार ‘मियाजाकी आम’ (Miyazaki Mango) उगाकर सबको चौंका दिया है। जापान की इस दुर्लभ आम की किस्म की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है। जैसे ही पेड़ पर फल आए, किसान का बगीचा स्थानीय लोगों और कृषि प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बन गया।

Mango Farming


जापान का लग्जरी आम अब ओडिशा की मिट्टी में

मियाजाकी आम मूल रूप से जापान के मियाजाकी प्रांत की प्रसिद्ध किस्म है। इसे ‘ताइयो नो तामागो’ (Taiyo no Tamago) यानी ‘सूरज का अंडा’ भी कहा जाता है। इसका गहरा लाल-बैंगनी रंग, बेहतरीन मिठास और मुलायम गूदा इसे आम किस्मों से अलग बनाता है। जापान में यह आम लग्जरी फल की श्रेणी में आता है और इसे अक्सर महंगे उपहार के रूप में खरीदा जाता है। अब ओडिशा के तमसा गांव के किसान देबा पधियामी ने इसे सफलतापूर्वक उगाकर एक नई मिसाल कायम की है।

चार साल की मेहनत के बाद मिला फल

देबा पधियामी को लगभग चार वर्ष पहले एक समाजसेवी के माध्यम से मियाजाकी आम का पौधा मिला था। चुनौतीपूर्ण मौसम और जलवायु के बावजूद उन्होंने धैर्य और मेहनत से इसकी देखभाल की। कई वर्षों की मेहनत के बाद पेड़ पर पहली बार फल लगने शुरू हुए, जिससे किसान और स्थानीय लोग बेहद उत्साहित हैं।

दूर-दूर से देखने पहुंच रहे लोग

दुनिया के सबसे महंगे आमों में शामिल इस फल की चर्चा पूरे इलाके में फैल चुकी है। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग इस अनोखे आम को देखने के लिए देबा पधियामी के बगीचे पहुंच रहे हैं। कई लोग इसकी खेती के बारे में जानकारी लेने और इसकी खासियत जानने के लिए भी उत्सुक दिखाई दे रहे हैं।

चोरी के डर से रातभर कर रहे रखवाली

मियाजाकी आम की ऊंची कीमत और बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए किसान को सुरक्षा की चिंता भी सताने लगी है। देबा पधियामी का कहना है कि वह रात में पेड़ के पास ही सोते हैं ताकि कोई फल चोरी न कर सके। उन्होंने बताया कि ये आम बेहद दुर्लभ और कीमती हैं, इसलिए वह दिन-रात उनकी निगरानी कर रहे हैं।

सबसे बड़ी चुनौती: बाजार तक पहुंच

हालांकि मियाजाकी आम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये प्रति किलो तक पहुंचती है, लेकिन देबा पधियामी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसकी मार्केटिंग और बिक्री है। उन्हें अभी यह जानकारी नहीं है कि इस प्रीमियम फल को किस तरह पैक किया जाए, कहां बेचा जाए और ऐसे खरीदारों तक कैसे पहुंचा जाए जो इसकी वास्तविक कीमत चुकाने को तैयार हों।

विशेषज्ञों का मानना है कि जापान में मिलने वाली ऊंची कीमत गुणवत्ता मानकों, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और निर्यात प्रमाणन पर आधारित होती है। इसलिए भारत में भी बेहतर मार्केटिंग और सप्लाई चेन विकसित होने पर ऐसे किसान बड़ी आर्थिक सफलता हासिल कर सकते हैं।

किसानों के लिए प्रेरणा बनी यह कहानी

देबा पधियामी की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान नई और दुर्लभ फसलों की खेती को अपनाएं तो पारंपरिक खेती के मुकाबले कहीं अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। मियाजाकी आम की खेती न केवल कृषि क्षेत्र में नवाचार का उदाहरण है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक संभावनाओं के नए द्वार भी खोल सकती है।

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