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Solid Waste Management Rule: 1 अप्रैल से शादी-पार्टी में 100 मेहमान पर देनी होगी सूचना

Solid Waste Management Rule: छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में 1 अप्रैल 2026 से नई सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी लागू होने जा रही है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित इस नए नियम के तहत अब कचरा प्रबंधन को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है।

Solid Waste Management Rule


100 मेहमान पर देना होगा नोटिस

नए नियम के अनुसार:

  • शादी, पार्टी या किसी भी आयोजन में 100 से अधिक मेहमान होने पर
  • आयोजक को 3 दिन पहले नगर निगम/पालिका को सूचना देना अनिवार्य होगा
  • नियम का उल्लंघन करने पर ₹500 से ₹50,000 तक जुर्माना

यह कदम बड़े आयोजनों में उत्पन्न कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए उठाया गया है।

कचरा अब 4 तरह से अलग करना अनिवार्य

नई पॉलिसी के तहत अब हर घर और संस्थान को कचरा चार हिस्सों में अलग करना होगा:

  1. गीला कचरा – खाना, सब्जी-फल के छिलके (कंपोस्ट के लिए)
  2. सूखा कचरा – प्लास्टिक, कागज, कांच, धातु (रीसाइक्लिंग के लिए)
  3. सैनिटरी वेस्ट – डायपर, नैपकिन (अलग पैकिंग जरूरी)
  4. विशेष कचरा – बैटरी, बल्ब, दवाइयां (अधिकृत एजेंसी को देना होगा)

अगर कचरा मिक्स करके दिया गया, तो कलेक्शन वाहन उठाने से मना कर सकते हैं और मौके पर जुर्माना लगेगा।

रेहड़ी-पटरी वालों के लिए नए नियम

  • हर स्ट्रीट वेंडर को डस्टबिन रखना अनिवार्य
  • कचरा सड़क पर नहीं छोड़ सकेंगे
  • निगम के निर्धारित डिपो में ही कचरा डालना होगा

Bulk Waste Generator पर सख्ती

बड़े संस्थानों जैसे:

  • हाउसिंग सोसाइटी
  • होटल
  • अस्पताल
  • विश्वविद्यालय

इन्हें अपने स्तर पर ही कचरा प्रोसेस करना होगा।

क्या है सरकार का उद्देश्य?

नई पॉलिसी का मकसद:

  • स्वच्छ भारत मिशन को मजबूती देना
  • कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण
  • लैंडफिल पर निर्भरता कम करना
  • रीसाइक्लिंग और रीयूज को बढ़ावा देना

डिजिटल ट्रैकिंग और नई व्यवस्था

  • कचरा प्रबंधन की डिजिटल मॉनिटरिंग
  • सेंट्रलाइज्ड पोर्टल से ट्रैकिंग
  • कचरा बीनने वालों का पंजीकरण और पहचान पत्र

नागरिकों के लिए जरूरी सलाह

  • 1 अप्रैल से पहले घर में चार डस्टबिन की व्यवस्था करें
  • कचरा अलग-अलग करके ही दें
  • नियमों का पालन करें, ताकि जुर्माने से बच सकें

बड़ा बदलाव, बड़ी जिम्मेदारी

नई पॉलिसी 2016 के पुराने नियमों की जगह लेगी और इसे ज्यादा सख्त, तकनीकी और प्रभावी बनाया गया है। छत्तीसगढ़ के 193 नगरीय निकायों के लिए इसे लागू करना बड़ी चुनौती होगी।

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