5G Network Slicing Rules: TRAI का नया 5G प्लान बना टेलीकॉम कंपनियों की चिंता Jio-Airtel-Vi ने गिनाई परेशानियां
5G Network Slicing Rules: भारत में 5G सर्विस को लेकर टेलीकॉम कंपनियों और TRAI के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। Reliance Jio, Airtel और Vodafone Idea (Vi) ने TRAI के प्रस्तावित 5G नेटवर्क स्लाइसिंग नियमों पर आपत्ति जताई है। कंपनियों का कहना है कि तय सीमा लागू होने से 5G नेटवर्क की क्षमता और स्पेक्ट्रम के बेहतर इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है।

क्या है 5G Network Slicing?
5G Network Slicing एक ऐसी तकनीक है, जिसमें एक ही 5G नेटवर्क को अलग-अलग वर्चुअल हिस्सों में बांटा जा सकता है। इसका इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से किया जाता है।उदाहरण के तौर पर, किसी कंपनी को बेहद तेज और भरोसेमंद इंटरनेट की जरूरत है तो टेलीकॉम ऑपरेटर उसके लिए नेटवर्क का एक अलग हिस्सा उपलब्ध करा सकता है।इस तकनीक का इस्तेमाल इंडस्ट्री, स्मार्ट सिटी, हेल्थकेयर, ऑटोमेशन और एंटरप्राइज सेवाओं में किया जा सकता है।
TRAI ने 5G Network Slicing को लेकर क्या प्रस्ताव दिया?
TRAI ने 5G नेटवर्क स्लाइसिंग को लेकर ड्राफ्ट नियमों में सुझाव दिया है कि जिन क्षेत्रों में नेटवर्क स्लाइसिंग का इस्तेमाल हो रहा है, वहां रेडियो रिसोर्स का उपयोग 80% से अधिक नहीं होना चाहिए।TRAI का मानना है कि इससे आम मोबाइल यूजर्स के लिए नेटवर्क क्षमता बनी रहेगी और इंटरनेट स्पीड व सर्विस क्वालिटी प्रभावित नहीं होगी।
Airtel ने 80% लिमिट पर जताई आपत्ति
Airtel का कहना है कि नेटवर्क का 80% से ज्यादा इस्तेमाल होने का मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों को खराब सर्विस मिलेगी।कंपनी के मुताबिक, ऐसी लिमिट लगाने से स्पेक्ट्रम का सही इस्तेमाल प्रभावित हो सकता है और नेटवर्क क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त निवेश करना पड़ सकता है।
Jio ने TRAI के प्रस्ताव पर उठाए सवाल
Reliance Jio का कहना है कि 5G नेटवर्क आधुनिक तकनीक पर आधारित है और ज्यादा उपयोग के बावजूद बेहतर तरीके से काम करने में सक्षम है।कंपनी का मानना है कि एक तय उपयोग सीमा लगाने से नेटवर्क संसाधनों का पूरा फायदा उठाना मुश्किल हो सकता है।
Vi ने भी नियमों को लेकर जताई चिंता
Vodafone Idea (Vi) का कहना है कि नेटवर्क स्लाइसिंग का उद्देश्य ही जरूरत के हिसाब से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है।कंपनी के मुताबिक, हर नेटवर्क सेल के लिए एक जैसी उपयोग सीमा तय करना तकनीकी रूप से सही नहीं हो सकता।
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TRAI के समर्थन में भी उठी आवाज
टेलीकॉम कंपनियों की आपत्तियों के बीच कुछ पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञ TRAI के प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं।उनका कहना है कि ऐसी सीमा आम मोबाइल ग्राहकों के लिए सुरक्षा की तरह काम कर सकती है, ताकि प्रीमियम 5G सेवाओं के कारण सामान्य यूजर्स प्रभावित न हों।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल मामला ड्राफ्ट प्रस्ताव और कंपनियों की प्रतिक्रियाओं तक सीमित है। TRAI टेलीकॉम कंपनियों और अन्य पक्षों से मिले सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम जारी कर सकता है।अगर नए नियम लागू होते हैं तो भारत में 5G नेटवर्क मैनेजमेंट और यूजर एक्सपीरियंस पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
