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Youth Parliament: दिल्ली की युवा संसद में सुकमा की गूंज, सुशील मरकाम का अंग्रेजी भाषण वायरल

Youth Parliament: दिल्ली में आयोजित युवा संसद (Youth Parliament) में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से पहुंचे सुशील मरकाम (Sushil Markam) ने ऐसा भाषण दिया कि पूरा सदन तालियों से गूंज उठा। बस्तर के इस युवा ने जब पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में मंच संभाला और अंग्रेजी में प्रभावशाली स्पीच शुरू की, तो हर कोई उनकी ओर ध्यान से सुनने लगा। अब उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक — सुशील मरकाम का शानदार प्रतिनिधित्व

नक्सल प्रभावित क्षेत्र सुकमा (Sukma) के रहने वाले सुशील मरकाम ने दिल्ली में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आत्मविश्वास दोनों का परिचय दिया। वे बस्तर की पारंपरिक पोशाक में मंच पर पहुंचे और अपनी स्पीच की शुरुआत एक प्रभावशाली कविता से की —

“था एक सरदार मन का, लौह पुरुष आवाज जन का,
चल पड़े अधिकार लेने एकता अभियान लेकर…
क्या गरीबी क्या किसानी, एकता की वह जबानी,
ला दिया मन में भूचाल आजादी का अभियान लेकर…”

इस कविता के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ी में अभिवादन किया और फिर अंग्रेजी में अपना भाषण जारी रखा। उनकी धाराप्रवाह और प्रभावशाली अंग्रेजी सुनकर युवा संसद में मौजूद सभी लोग प्रभावित हो गए।


सरदार वल्लभभाई पटेल पर दिया भाषण

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) के अवसर पर आयोजित किया गया था। सुशील मरकाम ने अपने भाषण का विषय “सरदार वल्लभभाई पटेल और राष्ट्रीय एकता” रखा।
उन्होंने कहा कि — “Patel was not just a man of iron, but a man of unity, courage, and vision. His dream of a united India is not history, it’s a living inspiration.”

उनका भाषण आत्मविश्वास, उच्चारण और भावनाओं का अनूठा संगम था। मंच पर बोलते समय उन्होंने जिस तरह बस्तर की संस्कृति को अपनी वेशभूषा से दर्शाया और अंग्रेजी भाषा में विचार रखे, वह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बन गया।


सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

सुशील मरकाम की यह स्पीच अब X (Twitter), Facebook, Instagram और YouTube पर वायरल हो चुकी है। लोग उनकी वेशभूषा, आत्मविश्वास और शुद्ध अंग्रेजी में दिए गए संदेश की सराहना कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा — “This is real representation of India’s diversity and unity!”


बस्तर से दिल्ली तक प्रेरणा की कहानी

सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित इलाके से निकलकर राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता। लेकिन सुशील मरकाम ने यह साबित कर दिया कि संघर्ष की जमीन से भी सफलता की फसल उगाई जा सकती है। उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ बस्तर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के युवाओं में उत्साह का माहौल है।

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