यह व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को रखा जाता है।
सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं।
मान्यता है कि सावित्री ने अपने तप और प्रेम से सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले लिए थे।
यह व्रत प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
वट सावित्री व्रत को सुहाग और सौभाग्य से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है।