Rani Lakshmi Bai Jayanti 2025: खूब लड़ी मर्दानी… रानी लक्ष्मीबाई जयंती पर ऐसा लिखें दमदार भाषण और निबंध
Rani Lakshmi Bai Jayanti 2025 Speech, Essay in Hindi: भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महान वीरांगना, नारी शक्ति की प्रतीक और अत्याचार के खिलाफ अदम्य साहस से लड़ने वाली रानी लक्ष्मीबाई की जयंती 19 नवंबर को पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। उनके पराक्रम, युद्ध कौशल और मातृभूमि के प्रति अद्वितीय समर्पण ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी। स्कूल–कॉलेजों में इस अवसर पर छात्र भाषण (Speech) और निबंध (Essay) प्रस्तुत करते हैं। यहां पढ़ें रानी लक्ष्मीबाई का जीवन परिचय, भाषण और निबंध, जिन्हें आप अपने कार्यक्रम में उपयोग कर सकते हैं।

झांसी की रानी का जीवन परिचय (Jeevan Parichay)
19 नवंबर 1828 को बनारस में जन्मी मणिकर्णिका (मनु) बचपन से ही असाधारण साहसी थीं। उनके पिता मोरोपंत तांबे पेशवा बाजीराव द्वितीय के दरबार में कार्यरत थे। छोटी उम्र में ही मनु की मां का निधन हो गया, जिसके बाद उनके पिता ने ही उनका लालन-पालन किया।
बचपन में ही मनु ने—
- घुड़सवारी
- तलवारबाज़ी
- तीरंदाजी
- आत्मरक्षा
जैसे कौशल सीख लिए थे।
साल 1842 में उनकी शादी झांसी के राजा गंगाधर राव नेवलकर से हुई और वे लक्ष्मीबाई के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
Rani Lakshmi Bai Jayanti Speech 2025 (लक्ष्मीबाई जयंती पर भाषण)
“खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झांसी वाली रानी थी…”
सम्मानित प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे साथियों,
आज हम सब उस वीरांगना की जयंती मना रहे हैं, जिसने सिर्फ 29 वर्ष की छोटी-सी उम्र में अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी। रानी लक्ष्मीबाई भारत की उन महान महिलाओं में से हैं, जिन्होंने संकट की घड़ी में नेतृत्व संभाला और यह सिद्ध कर दिया कि नारी किसी से कम नहीं।
1853 में राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने “डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स” के तहत झांसी को हड़पने की कोशिश की। लेकिन रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों की हर चाल, हर धोखे का साहस के साथ मुकाबला किया और स्पष्ट कहा—
“मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी!”
उन्होंने दामोदर राव को गोद लेकर राजकुमार घोषित किया, पर अंग्रेजों ने इसे मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद रानी ने बैरिस्टर जॉन लैंग की सलाह ली और कई रियासतों को साथ मिलाकर अंग्रेजों के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया।
हालाँकि कम सेना होने के बावजूद रानी लक्ष्मीबाई ने इतनी शौर्यगाथा लिखी कि ब्रिटिश जनरलों तक ने उनकी वीरता की प्रशंसा की। उनका जीवन हमें साहस, निष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
Rani Lakshmi Bai Jayanti Essay (लक्ष्मीबाई जयंती पर निबंध)
रानी लक्ष्मीबाई भारत की सबसे महान शहीदों में से एक हैं, जिनका नाम सुनते ही साहस और देशभक्ति की भावना जागृत हो जाती है। उन्होंने न केवल झांसी की रक्षा की, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए स्वतंत्रता की लौ जगाई।
अंग्रेजों की क्रूर नीतियों और “लैप्स नीति” का विरोध करते हुए उन्होंने झांसी को बचाने के लिए व्यापक संघर्ष किया। उन्होंने बाणपुर, ओरछा और अन्य रियासतों के राजाओं को पत्र लिखकर अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।
1857 के विद्रोह में रानी लक्ष्मीबाई का योगदान सबसे निर्णायक रहा। उन्होंने घोड़े बादल पर सवार होकर अद्भुत साहस के साथ युद्ध किया। रणभूमि में घायल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। 18 जून 1858 को वह लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुईं।
उनकी शहादत ने स्वतंत्रता संग्राम को गति दी और आज भी उनकी गाथा करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा है।
Rani Lakshmi Bai Jayanti 2025: मुख्य तथ्य
- जन्म: 19 नवंबर 1828, बनारस
- विवाह: 1842, राजा गंगाधर राव
- 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख नेता
- वीरगति: 18 जून 1858
- प्रसिद्ध वाक्य: “मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।”
