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Railway AI Safety System: अब एआई करेगा ट्रेनों की सुरक्षा जांच

Railway AI Safety System: भारतीय रेलवे यात्रियों की सुरक्षा के लिए तकनीक का सहारा ले रहा है। अब ट्रेनों के नीचे के हिस्से (अंडरगियर) में होने वाली खराबियों की पहचान हाई-स्पीड कैमरे और एआई तकनीक (Railway AI Safety System) से की जाएगी। इससे जांच प्रक्रिया तेज, सटीक और पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी।

उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में इस परियोजना के लिए 98.51 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया है। यह कार्य छह साल में पूरा किया जाएगा और यह पहला मौका होगा जब प्रयागराज डिवीजन में कांपैक्ट डिजाइन वाला रोलिंग इन-आउट परीक्षा हट (Examination Hut) बनेगा।

कैसे काम करेगा रेलवे का नया एआई सुरक्षा सिस्टम

ट्रेन के नीचे के हिस्से को देखना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। जब ट्रेन 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्टेशन पर गुजरती है, तो टूटे स्प्रिंग, ढीले बोल्ट, गर्म एक्सल या लटकते पार्ट्स जैसी छोटी खराबियां अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं।

अब रेलवे का नया Railway AI Safety System इन सभी समस्याओं को पकड़ लेगा।

  • ट्रैक के किनारे लो-हाइट IP आधारित हाई-स्पीड कैमरे लगाए जाएंगे।
  • इनमें 12x जूम, वेरिफोकल लेंस और नाइट विजन की सुविधा होगी।
  • ये कैमरे प्रति सेकंड 60 से अधिक फ्रेम्स में तस्वीरें कैप्चर करेंगे।
  • ट्रेन गुजरते ही ये हर बारीकी को रिकॉर्ड कर लेंगे।

ये कैमरे वाई-फाई के ज़रिए 42-इंच के एलईडी मॉनिटर से जुड़े रहेंगे, जिससे कर्मचारी रीयल-टाइम में निरीक्षण कर सकेंगे।

एआई करेगा स्वतः विश्लेषण

जब ट्रेन रोलिंग इन (स्टेशन पर प्रवेश) या रोलिंग आउट (स्टेशन से प्रस्थान) करती है, तब एआई सिस्टम कैमरों से मिली तस्वीरों का विश्लेषण करेगा।

  • एआई संभावित खराबियों जैसे गर्म एक्सल, ढीले हिस्से या टूटे पार्ट्स की पहचान करेगा।
  • रिपोर्ट तुरंत मेंटेनेंस टीम तक पहुंच जाएगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी।

एनसीआर के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी के अनुसार, प्रयागराज में इस परियोजना की निविदा जारी हो चुकी है और इस माह से कार्य शुरू हो जाएगा।

रोलिंग लाइटें कैसे करेंगी मदद

यह सिस्टम रोलिंग लाइटों (Rolling Lights) से भी जुड़ा होगा — ये खास लाइटें ट्रेन की गति के साथ सिंक होकर चमकती हैं, जिससे अंधेरे या खराब मौसम में भी ट्रैक के नीचे का हिस्सा साफ दिख सके।

  • इन लाइटों में इंफ्रारेड तकनीक होती है।
  • ये कोहरे, बारिश और रात में भी हाई-डेफिनिशन तस्वीरें कैप्चर करने में मदद करती हैं।
  • इससे नाइट विजन कैमरों की कार्यक्षमता दोगुनी हो जाएगी।

रेलवे सुरक्षा में तकनीक का नया अध्याय

इस एआई आधारित सुरक्षा प्रणाली से रेलवे की जांच प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित और डिजिटल हो जाएगी।

  • मैनुअल जांच की आवश्यकता घटेगी।
  • सुरक्षा, दक्षता और रखरखाव की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आएगा।
  • भारतीय रेलवे अब दुनिया के उन नेटवर्क्स की श्रेणी में शामिल होगा जो एआई विजुअल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सुरक्षा निरीक्षण के लिए करते हैं।

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