New Income Tax Act: 5 लाख से कम कीमत की कार या बाइक खरीदने पर नहीं देना होगा PAN, जानिए नए नियम का मतलब
New Income Tax Act: नए इनकम टैक्स कानून को लेकर आम लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। New Income Tax Act, 2025 के ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए गए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इन नए नियमों के तहत अब 5 लाख रुपये से कम कीमत की कार, बाइक या अन्य मोटर व्हीकल खरीदने या बेचने पर PAN कार्ड देना जरूरी नहीं होगा। फिलहाल मौजूदा नियमों के अनुसार, वाहन की कीमत चाहे जितनी भी हो, खरीद-बिक्री के समय PAN देना अनिवार्य है। लेकिन नए कानून में इस सीमा को तय कर दिया गया है।

5 लाख से कम कीमत के वाहन पर PAN की जरूरत क्यों खत्म की गई?
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का मानना है कि छोटे और मध्यम वर्ग के ट्रांजेक्शंस में अनावश्यक PAN कंप्लायंस बोझ बन रहा था।
इसलिए नए ड्राफ्ट नियमों में यह साफ किया गया है कि:
- ₹5 लाख से कम वैल्यू के मोटर व्हीकल ट्रांजेक्शन
- कार, बाइक या किसी अन्य वाहन की खरीद-बिक्री
इन सभी मामलों में PAN अनिवार्य नहीं होगा।
किन ट्रांजेक्शंस में PAN देना अब भी जरूरी रहेगा?
ड्राफ्ट नियमों के Rule 159 और Rule 150 में साफ किया गया है कि बड़े और हाई-वैल्यू फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस को ट्रैक करने के लिए PAN जरूरी रहेगा।
इन मामलों में PAN देना अनिवार्य होगा:
- बैंक या डीमैट अकाउंट खोलने पर
- क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते समय
- म्यूचुअल फंड, बॉन्ड्स या सिक्योरिटीज खरीदने पर
- ज्यादा वैल्यू की मोटर व्हीकल (₹5 लाख से ऊपर) खरीदने पर
- प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने पर
- होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल या इवेंट का बड़ा बिल चुकाने पर
कैश ट्रांजेक्शन पर PAN को लेकर क्या बदला?
नए नियमों के अनुसार:
- अगर कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में
- ₹10 लाख या उससे ज्यादा कैश डिपॉजिट
- या ₹10 लाख या उससे ज्यादा कैश विड्रॉल करता है, तो PAN देना अनिवार्य होगा।
अभी यह सीमा काफी कम है और एक दिन में ₹50,000 से ज्यादा कैश डिपॉजिट पर PAN देना पड़ता है।
होटल और इवेंट बिल पर PAN की नई सीमा
- होटल, रेस्टोरेंट, कन्वेंशन सेंटर या बैंक्वेट हॉल का ₹1 लाख से ज्यादा बिल चुकाने पर PAN देना होगा।
- अभी यह सीमा ₹50,000 है।
कब से लागू होंगे नए इनकम टैक्स नियम?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट में घोषणा की थी कि:
- Income Tax Act, 2025
- 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा
- यह मौजूदा Income Tax Act, 1961 की जगह लेगा
नए कानून में:
- नियमों की संख्या कम की गई है
- भाषा को सरल बनाया गया है
- आम टैक्सपेयर्स को एक्सपर्ट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा
