Navratri 2025 Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलता है धैर्य और ज्ञान, आज द्विपुष्कर योग का बनेगा संयोग
Navratri 2025 Day 2
शारदीय नवरात्र 2025 का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। अश्विन मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर मां के इस स्वरूप की उपासना की जाती है। इस वर्ष यह तिथि 23 सितंबर 2025, मंगलवार को है। विशेष बात यह है कि इस दिन द्विपुष्कर योग का संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस योग में किए गए शुभ कार्य का फल दोगुना मिलता है।

मां ब्रह्मचारिणी संयम, तपस्या, ज्ञान और विद्या की देवी मानी जाती हैं। उनके नाम से ही ब्रह्मचर्य और अनुशासन का संदेश मिलता है। जो साधक नवरात्रि में श्रद्धापूर्वक मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करता है, उसे मानसिक शांति, धैर्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
आज का शुभ मुहूर्त और राहुकाल
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक
- राहुकाल: दोपहर 3:15 बजे से 4:46 बजे तक
- सूर्य: कन्या राशि में
- चंद्रमा: कन्या राशि में, 24 सितंबर को तुला में प्रवेश करेंगे
23 सितंबर 2025 के विशेष योग
इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं:
- द्विपुष्कर योग – शुभ कार्य का फल दोगुना प्राप्त होता है
- ब्रह्म योग और इंद्र योग – जीवन में सफलता और उन्नति प्रदान करते हैं
- बुधादित्य योग – सूर्य और बुध की युति से
- गजकेसरी योग – चंद्र और गुरु की स्थिति से
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीपक जलाकर फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
- मंत्र जप करें – “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥”
- मां की कथा सुनें और आरती करें।
- ध्यान और प्रार्थना के साथ व्रत संपन्न करें।
मां ब्रह्मचारिणी का महत्व
- मां का प्रिय फूल: चमेली
- शुभ रंग: लाल
- पूजा करने से विद्या, ज्ञान, शक्ति और धैर्य की प्राप्ति होती है।
- विद्यार्थी और नौकरीपेशा लोग इस व्रत से विशेष लाभ पाते हैं।
पौराणिक कथा: कैसे पड़ा ब्रह्मचारिणी नाम?
पौराणिक मान्यता है कि राजा हिमवान की पुत्री पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों की तपस्या के बाद उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया। यही तपस्या उन्हें शक्ति, संयम और ब्रह्मचर्य की देवी के रूप में स्थापित करती है।
निष्कर्ष
Navratri 2025 Day 2 पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। इस बार द्विपुष्कर योग के संयोग से यह दिन और भी शुभ हो गया है। श्रद्धापूर्वक मां की उपासना करने से जीवन में अनुशासन, ज्ञान और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
