Mahashivratri 2026: शिवलिंग पूजा के दौरान भूलकर भी न चढ़ाएं ये 8 चीजें, जानें सही नियम
Mahashivratri 2026: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान Shiva को समर्पित सबसे पवित्र रात मानी जाती है। इस दिन भक्त शिवलिंग का अभिषेक, व्रत और रात्रि जागरण करते हैं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केवल भक्ति ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूजा की शुद्धता और शास्त्रीय नियमों का पालन भी जरूरी है। कई बार भक्त अनजाने में ऐसी चीजें चढ़ा देते हैं, जिससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। आइए जानते हैं कि Mahashivratri 2026 पर शिवलिंग पूजा के दौरान किन 8 चीजों से बचना चाहिए।

शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये 8 चीजें
हल्दी
हल्दी को स्त्री शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। चूंकि शिवलिंग को पुरुष तत्व का प्रतीक माना गया है, इसलिए शिव पूजा में हल्दी चढ़ाना वर्जित बताया गया है।
तुलसी दल
हिंदू धर्म में तुलसी पवित्र मानी जाती है, लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार इसे शिवलिंग पर अर्पित नहीं किया जाता। तुलसी का संबंध एक दैवीय श्राप से जुड़ा माना गया है।
केतकी का फूल
शास्त्रों में केतकी के फूल को शिव पूजा में निषिद्ध बताया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार एक दैवीय विवाद में केतकी ने झूठी गवाही दी थी, जिसके कारण भगवान शिव ने इसे पूजा में स्वीकार न करने का वरदान दिया।
फटे या गंदे बेल पत्र
बेल (बिल्व) पत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं, लेकिन वे साबुत, साफ और तीन पत्तियों वाले होने चाहिए। फटे या गंदे बेल पत्र चढ़ाना अशुभ माना जाता है।
नारियल पानी
हालांकि नारियल पवित्र माना जाता है, लेकिन शिवलिंग अभिषेक में नारियल पानी का प्रयोग सामान्यतः नहीं किया जाता, सिवाय कुछ विशेष विधियों के।
गलत धातु के बर्तन
अभिषेक के दौरान दूध और दही पीतल या कांसे के बर्तनों के साथ रिएक्ट कर सकते हैं। इसलिए स्टील, चांदी या मिट्टी के पात्र का उपयोग करना बेहतर माना गया है।
बासी या पैकेट वाला प्रसाद
शिव पूजा में ताजगी और पवित्रता का विशेष महत्व है। बासी मिठाई, पैकेट वाला प्रसाद या बचा हुआ भोजन अर्पित नहीं करना चाहिए।
केवल सुबह की पूजा
महाशिवरात्रि की सबसे बड़ी गलती है केवल सुबह पूजा करना। इस पर्व की विशेषता रात्रि जागरण और चार प्रहर की पूजा में है। रात के चारों प्रहर में शिव अभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
महाशिवरात्रि की रात का आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात ब्रह्मांडीय ऊर्जा का विशेष संयोग होता है। इस दिन उपवास, ध्यान और रात्रि पूजा करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेल पत्र, धतूरा और भांग अर्पित करना शुभ माना गया है, लेकिन शास्त्रीय नियमों का पालन करना आवश्यक है।
