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High Court Decision: अब निजी स्कूलों में 5वीं-8वीं की परीक्षा स्कूल शिक्षा विभाग कराएगा, एसोसिएशन की याचिका खारिज

बिलासपुर: प्रदेश के निजी स्कूलों से जुड़े एक अहम मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 5वीं और 8वीं की वार्षिक परीक्षाएं अब स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित की जाएंगी। निजी स्कूल प्रबंधन की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि परीक्षा आयोजन का अधिकार शासन के पास ही रहेगा।

High Court Decision


क्या था पूरा मामला?

Chhattisgarh Private School Management Association ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि निजी स्कूलों को 5वीं और 8वीं की परीक्षाएं स्वयं आयोजित करने की अनुमति दी जाए। हालांकि, सुनवाई के बाद अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया और स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश को बरकरार रखा।

6200 से ज्यादा निजी स्कूलों पर असर

इस फैसले के बाद प्रदेश में संचालित सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त करीब 6200 हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों में अब 5वीं और 8वीं की परीक्षाएं सरकारी स्तर पर आयोजित होंगी। इससे परीक्षा प्रणाली में एकरूपता और पारदर्शिता आने की उम्मीद जताई जा रही है।

फर्जी स्कूलों पर पड़ेगा असर

हाईकोर्ट के इस फैसले को बिना मान्यता या संदिग्ध तरीके से संचालित तथाकथित सीबीएसई स्कूलों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। लंबे समय से कुछ स्कूल खुद को Central Board of Secondary Education (CBSE) से संबद्ध बताकर एडमिशन ले रहे थे, जबकि उनके पास वैध मान्यता या शासन की अनुमति नहीं थी। अब जब परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी सीधे स्कूल शिक्षा विभाग के पास होगी, तो ऐसे स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने आने की संभावना है।

पारदर्शिता और गुणवत्ता पर जोर

सुनवाई के दौरान हस्तक्षेप याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने शिक्षा की गुणवत्ता और नियमों के पालन पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि फर्जी स्कूलों के कारण हजारों बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

कोर्ट के फैसले के बाद अब:

  • परीक्षा आयोजन
  • मूल्यांकन
  • निगरानी

की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग पर होगी। इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।

क्या बदलेगा अब?

  • 5वीं और 8वीं की वार्षिक परीक्षा अब सरकारी स्तर पर
  • निजी स्कूलों की जवाबदेही बढ़ेगी
  • फर्जी और बिना मान्यता वाले स्कूलों पर कार्रवाई की राह आसान
  • छात्रों के परिणाम में पारदर्शिता

यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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