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Gold Price Outlook: 12 दिन में सोना 12,000 रुपये और चांदी 43,000 रुपये टूटी, जानिए क्यों गिर रहे दाम

नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। आमतौर पर वैश्विक अस्थिरता और युद्ध जैसे हालात में सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार बाजार का रुख अलग नजर आ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक और घरेलू बाजारों में भारी मुनाफावसूली और निवेशकों की लिक्विडिटी जरूरतों के कारण गोल्ड और सिल्वर के दाम नीचे आए हैं।

Gold Price Outlook


12 दिन में सोना 12,000 रुपये से ज्यादा टूटा

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर 2 मार्च को सोने का वायदा भाव करीब 1,69,880 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। लेकिन 13 मार्च को कारोबार के दौरान यह गिरकर करीब 1,57,540 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गया। इस तरह सिर्फ 12 दिनों में सोने की कीमत में करीब 12,340 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है।

चांदी में 43,000 रुपये की बड़ी गिरावट

सोने के साथ-साथ चांदी के दाम भी तेजी से गिरे हैं। Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर 2 मार्च को चांदी का वायदा भाव करीब 2,97,799 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था। वहीं 13 मार्च को कारोबार के दौरान यह गिरकर 2,54,474 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। इस तरह करीब 12 दिनों में चांदी में 43,325 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है।

वैश्विक बाजार में भी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

  • COMEX पर सोना 1.25% गिरकर 5,061.70 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ।
  • गोल्ड स्पॉट करीब 1.18% गिरकर 5,019.49 डॉलर प्रति औंस रहा।
  • वहीं चांदी 4.44% गिरकर 81.34 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई।
  • सिल्वर स्पॉट 80.59 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

युद्ध और संकट के बावजूद क्यों गिर रहा सोना?

आमतौर पर वैश्विक तनाव, युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता के समय निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) मानकर खरीदते हैं। इससे कीमतों में तेजी आती है। लेकिन इस बार शेयर बाजारों में भारी गिरावट से निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई के लिए कई निवेशक सोने में मुनाफावसूली कर रहे हैं और नकदी बढ़ा रहे हैं। यही कारण है कि सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक हालात, डॉलर की मजबूती और निवेशकों की रणनीति के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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