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Foreign Investors Return: क्या लौट आया विदेशी निवेशकों का भरोसा? सिर्फ 7 दिन में ₹3,000 करोड़ की खरीदारी

Foreign Investors Return: लंबे समय से जारी बिकवाली के दौर के बाद अब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजारों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में बाजार में एक बार फिर से विदेशी पूंजी का प्रवाह (Foreign Investment Inflow) देखने को मिला है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेजी लौटी है।

Foreign Investors Return

NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, 7 से 14 अक्टूबर 2025 के बीच पांच कारोबारी दिनों में FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में ₹3,000 करोड़ से अधिक की शुद्ध खरीदारी की है। इसके अलावा, IPO मार्केट में भी निवेशकों ने ₹7,600 करोड़ से ज्यादा की हिस्सेदारी जोड़ी है। 15 अक्टूबर को भी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार FIIs ने लगभग ₹162 करोड़ की अतिरिक्त खरीदारी की।

बाजार में दिखा असर: सेंसेक्स-निफ्टी में बढ़त

विदेशी निवेशकों की वापसी ने बाजार की नब्ज़ को फिर से मजबूत किया है। अक्टूबर की शुरुआत से अब तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 3% की बढ़त दर्ज की गई है।

मिडकैप इंडेक्स में 3.4% की तेजी

स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.7% की वृद्धि

इससे यह संकेत मिलता है कि तेजी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी निवेशक विश्वास लौट रहा है।

पहले की बिकवाली और अब का पलटाव

वर्ष 2025 की शुरुआत से ही विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से ₹2 लाख करोड़ से अधिक की बिकवाली कर चुके थे। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और डॉलर की मजबूती ने भारत से पूंजी के बहिर्वाह को तेज किया था। लेकिन अब यह नकारात्मक प्रवृत्ति (Negative Trend) धीरे-धीरे बदलती दिख रही है, जिससे बाजार में नई उम्मीदें जगी हैं।

एक्सपर्ट्स की राय: सावधानी और अवसर दोनों

डेवेन चोकसी (Finserv) का कहना है कि यह विदेशी निवेश इस बात का संकेत है कि भारतीय कंपनियों की अर्निंग्स (Earnings) और आर्थिक संकेतक सुधर रहे हैं। निफ्टी अभी लगभग 20 गुना अर्निंग पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके उच्च स्तरों से नीचे है — यानी मूल्यांकन आकर्षक हैं।

वहीं, विनायक मागोत्रा (Centricity WealthTech) निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह देते हैं। उनके अनुसार, यह अभी “शॉर्ट-टर्म पलटाव” (Short-Term Rebound) हो सकता है, न कि स्थायी रुझान।

वे तीन प्रमुख जोखिम बताते हैं:

वैल्यूएशन में बढ़ोतरी

डेरिवेटिव मार्केट में भारी शॉर्ट पोजिशन

वैश्विक तनाव और संभावित बिकवाली

सनी अग्रवाल (SBI Securities) का मानना है कि यदि India–US ट्रेड समझौता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है, तो विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ सकती है।

निष्कर्ष: भरोसा लौटा है, पर अभी लंबा रास्ता बाकी

FII की वापसी निस्संदेह भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, यह देखना अभी बाकी है कि यह प्रवृत्ति दीर्घकालिक निवेश विश्वास में बदलती है या केवल अल्पकालिक राहत बनकर रह जाती है।
अगले कुछ सप्ताहों में वैश्विक आर्थिक माहौल, अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर इंडेक्स की दिशा यह तय करेगी कि यह रौनक टिकाऊ है या अस्थायी।

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