Festive Season: दीपावली आते ही देशभर के बाजारों में रौनक लौट आई है। हर गली, हर मॉल और हर मार्केट में खरीदारी का जोश देखने को मिल रहा है। इस बार का त्योहारी सीजन देश के व्यापार इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, दीपावली 2025 पर भारत का कुल व्यापार 4.75 लाख करोड़ रुपये के अभूतपूर्व स्तर को छूने जा रहा है — जो पिछले 10 वर्षों का सबसे बड़ा कारोबार होगा।
‘आत्मनिर्भर भारत’ की गूंज हर बाजार में
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक के सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान ने भारतीय व्यापार को नई दिशा दी है।
स्वदेशी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। लोग अब विदेशी वस्तुओं की बजाय देशी ब्रांड्स और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे न केवल व्यापार बढ़ रहा है बल्कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
त्योहारों में स्वदेशी की चमक
इस दीपावली, पारंपरिक बाजारों से लेकर आधुनिक मॉल तक, स्वदेशी उत्पादों की चमक देखने को मिल रही है।
मिट्टी के दीये, हस्तनिर्मित डेकोरेशन आइटम, भारतीय मिठाइयां, कपड़े, और स्थानीय ब्रांड्स के इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद उपभोक्ताओं की पहली पसंद बने हुए हैं।
खंडेलवाल ने कहा —
“इस बार की दीपावली सिर्फ घरों को नहीं बल्कि देश के लाखों व्यापारियों, कारीगरों और निर्माताओं के जीवन को भी रोशन करेगी।”
हर वर्ग की भागीदारी से चमका व्यापार
त्योहारी खरीदारी में हर वर्ग की भागीदारी दिख रही है —
कोई ₹500 से कम खर्च कर रहा है तो कोई लाखों की खरीदारी में जुटा है। यही विविधता भारतीय बाजार की सबसे बड़ी ताकत है।
कैट के अनुसार, इस बार विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में कारोबार का प्रतिशत इस प्रकार रहेगा:
श्रेणी
प्रतिशत (%)
खाद्य सामग्री, किराना
13
फल, ड्राईफ्रूट
3
मिठाई व नमकीन
4
वस्त्र
12
इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद
8
बिल्डर्स हार्डवेयर
3
होम डेकोर
3
काॅस्मेटिक
6
बर्तन व किचनवेयर
3
पूजा सामग्री
3
कन्फेक्शनरी व बेकरी उत्पाद
2
फर्नीचर व फर्निशिंग
4
गिफ्ट आइटम
8
विविध वस्तुएं व सेवाएं
24
कैट का अनुमान
कैट का मानना है कि 2025 की दीपावली न केवल कारोबार के लिहाज से रिकॉर्ड तोड़ेगी, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी नई ऊंचाई देगी। इससे भारत के रिटेल सेक्टर, निर्माण उद्योग और MSME सेक्टर में भारी उछाल देखने को मिलेगा।
निष्कर्ष
इस बार की दीपावली सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि “आर्थिक आत्मनिर्भरता का उत्सव” बनने जा रही है। देश के छोटे व्यापारी से लेकर बड़े कारोबारी तक — सब एक ही लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं: “स्थानीय बने – वैश्विक बने।”