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Chhath Puja 2025 Kharna: आज छठ पर्व का दूसरा दिन, जानें खरना का महत्व

Chhath Puja 2025 Kharna: लोक आस्था, श्रद्धा और सूर्योपासना का महान पर्व छठ पूजा पूरे देश में बड़ी ही भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को छठ का दूसरा दिन मनाया जाता है, जिसे खरना या लोहंडा कहा जाता है। आज, 27 अक्टूबर 2025 को खरना का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है, क्योंकि इसी के साथ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ होता है।


खरना का महत्व (Significance of Kharna)

छठ पूजा के चारों दिन बेहद पवित्र और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दूसरा दिन, यानी खरना, आत्मशुद्धि और तपस्या का प्रतीक है। इस दिन छठ व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम के समय सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हैं।

प्रसाद में शामिल होता है:

  • गुड़, चावल और दूध से बनी खीर
  • गेहूं के आटे की रोटी या पूरी
  • केला और अन्य फल

इन प्रसादों को पहले सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित किया जाता है, इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं। यही भोजन व्रतियों के 36 घंटे के निर्जला व्रत का प्रारंभ होता है।

चार शुभ योग (Auspicious Yogas on Kharna 2025)

इस साल खरना के दिन चार शुभ योग बन रहे हैं, जो इस पर्व की पवित्रता और फलदायीता को बढ़ा रहे हैं —

  1. सर्वार्थ सिद्धि योग – सभी कार्यों में सफलता का प्रतीक
  2. रवि योग – सूर्य उपासना के लिए अत्यंत शुभ
  3. शोभन योग – सौंदर्य और समृद्धि प्रदान करने वाला
  4. नवपंचम राजयोग – राजसुख और सिद्धि देने वाला योग

पंचांग के अनुसार:
कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 27 अक्टूबर सुबह 6:04 बजे तक रहेगी, जिसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा।

पूजा विधि (Kharna Puja Vidhi)

  • व्रती सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर पवित्रता का संकल्प लेते हैं।
  • पूरा दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास रखा जाता है।
  • शाम को पूजा स्थल को साफ-सुथरा कर सजाया जाता है।
  • सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर, रोटी या पूरी और केला का प्रसाद तैयार किया जाता है।
  • सूर्य देव और छठी मैया का ध्यान कर पहले सूर्य देव को, फिर छठी मैया को प्रसाद अर्पित किया जाता है।
  • प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।

छठ पूजा का धार्मिक संदेश (Spiritual Essence)

छठ महापर्व सूर्य देवता और प्रकृति की उपासना का प्रतीक है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण, अनुशासन, और आत्मसंयम का भी संदेश देता है। खरना का दिन इस तपस्या की शुरुआत का प्रतीक है, जब व्रती शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि के साथ सूर्य देव से आशीर्वाद की कामना करते हैं।

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