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CG News: रायपुर के साइकिलिस्ट सुरेश दुआ ने रचा इतिहास, 78 घंटे 58 मिनट में पूरी की 1200 किलोमीटर की चुनौती

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के साइकिलिस्ट सुरेश दुआ ने लंबी दूरी की साइकिलिंग में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रायपुर रैंडोन्यूर्स द्वारा आयोजित LRM 1200 साइकिलिंग इवेंट में सुरेश दुआ ने 1200 किलोमीटर की कठिन दूरी को मात्र 78 घंटे 58 मिनट में पूरा कर लिया, जबकि इस इवेंट को पूरा करने की अधिकतम समय-सीमा 90 घंटे निर्धारित थी।

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यह प्रतिष्ठित साइकिलिंग इवेंट 25 दिसंबर को आयोजित किया गया था। खास बात यह रही कि इस इवेंट में सुरेश दुआ अकेले प्रतिभागी थे और उन्होंने पूरी चुनौती अपने दम पर सफलतापूर्वक पूरी की।

चार दिनों में तय की 1200 किलोमीटर की दूरी

सुरेश दुआ, जो वर्तमान में एन.आई.टी. रायपुर में कार्यरत हैं, उन्होंने इस चुनौती को चार दिनों में अलग-अलग चरणों में पूरा किया—

  • पहला दिन: 350 किमी (रायपुर से देवरी, महाराष्ट्र)
  • दूसरा दिन: 380 किमी (रायपुर से सोहेला, ओडिशा)
  • तीसरा दिन: 300 किमी (रायपुर से कांकेर)
  • चौथा दिन: 170 किमी (रायपुर से गरियाबंद)

इस तरह उन्होंने कुल 1200 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय कर शानदार प्रदर्शन किया।

2025 में चार बार सुपर रैंडोन्यूर्स का खिताब

सुरेश दुआ वर्ष 2025 में अब तक चार बार ‘सुपर रैंडोन्यूर्स’ का खिताब अपने नाम कर चुके हैं। इनमें से एक सुपर रैंडोन्यूर्स खिताब उन्होंने केवल 6 दिनों के भीतर अर्जित किया था, जो उनकी असाधारण शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति को दर्शाता है।

रैंडोन्यूर्स कौन होते हैं?

रैंडोन्यूर्स (Randonneurs) वे साइकिलिस्ट होते हैं जो लंबी दूरी की साइकिलिंग प्रतियोगिताएं, जिन्हें ब्रेवेट (Brevets) कहा जाता है, तय समय-सीमा में पूरी करते हैं। ये दूरी सामान्यतः 200, 300, 400, 600 या उससे अधिक किलोमीटर की होती है। रैंडोन्यूर्स प्रतिस्पर्धा से अधिक आत्म-चुनौती, अनुशासन और सहनशक्ति के लिए साइकिलिंग करते हैं और उन्हें यह उपाधि आजीवन मिलती है।

लेह से उमलिंगला तक भी कर चुके हैं साइकिल यात्रा

इसी साल जुलाई 2025 में सुरेश दुआ ने लेह से उमलिंगला (दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास) तक की कठिन साइकिल यात्रा भी सफलतापूर्वक पूरी की थी।

आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2025 में अब तक वे 16,728 किलोमीटर, जबकि कुल मिलाकर 85,241 किलोमीटर से अधिक की साइकिलिंग कर चुके हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल रायपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।

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