CG News: पंचायतों में क्यूआर कोड आधारित मनरेगा पहल को पुरस्कार, मध्यस्थों पर निर्भरता घटी, व्यवस्था बनी अधिक पारदर्शी
CG News: छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को अधिक पारदर्शी, सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए अपनाई गई क्यूआर कोड और जीआईएस आधारित तकनीकी पहल को बड़ी सफलता मिली है। इस नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 (विशेष श्रेणी) से सम्मानित किया गया है।

इस पहल के तहत ग्राम पंचायतों में लगाए गए क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन कर ग्रामीण अब स्वीकृत कार्यों, परियोजनाओं, बजट और खर्च की पूरी जानकारी कुछ ही सेकंड में प्राप्त कर रहे हैं। इससे न केवल मध्यस्थों पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि 11 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता और भरोसा भी मजबूत हुआ है।
क्या है क्यूआर कोड आधारित मनरेगा व्यवस्था?
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा लागू इस प्रणाली में हर ग्राम पंचायत का अलग क्यूआर कोड तैयार किया गया है, जिसे पंचायत भवन और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लगाया गया है। इसे स्कैन कर ग्रामीण:
- पिछले तीन वर्षों के मनरेगा कार्यों का विवरण
- स्वीकृत परियोजनाएं, बजट और खर्च की स्थिति
- प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही, 90 दिन के रोजगार की जानकारी
- मासिक ग्रामसभा, रोजगार दिवस और चावल उत्सव से जुड़ी सूचनाएं
आसानी से देख सकते हैं।
3.70 लाख से अधिक स्कैन, बिना अतिरिक्त खर्च
यह क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था 1 सितंबर से शुरू की गई थी। अब तक इसे 3.70 लाख से अधिक बार स्कैन किया जा चुका है। खास बात यह है कि इस नवाचार पर सरकार को कोई बड़ा अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ा—सिर्फ क्यूआर कोड की फोटोकॉपी ग्राम पंचायतों में चिपकाई गई।
शिकायतों और RTI में आई बड़ी कमी
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली के लागू होने के बाद:
- मनरेगा से जुड़ी शिकायतों में लगभग 50% तक कमी आई है
- RTI आवेदनों की संख्या भी घटी है
इससे प्रशासनिक बोझ कम हुआ और योजना की विश्वसनीयता बढ़ी।
सरकार और अधिकारियों का क्या कहना है?
मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने बताया कि सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह नई तकनीकी पहल शुरू की है। ग्रामीण अब बिना किसी दलाल या कार्यालय के चक्कर लगाए रीयल-टाइम जानकारी प्राप्त कर पा रहे हैं। क्यूआर कोड से जुड़े भरोसे और जागरूकता के कारण यह पहल पूरे प्रदेश में सफलतापूर्वक लागू हो सकी।
क्यों है यह पहल खास?
- डिजिटल इंडिया की सोच को जमीनी स्तर पर मजबूती
- नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा
- पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास में इजाफा
- कम लागत में बड़ा प्रशासनिक सुधार
