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AI in Tirupati Temple: तिरुमला मंदिर बना देश का पहला AI-संचालित मंदिर, अब चेहरे की पहचान से भीड़ कंट्रोल तक सब होगा हाई-टेक

AI in Tirupati Temple 2025: भारत का प्रसिद्ध तिरुमला बालाजी मंदिर अब तकनीकी दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। देश का यह पहला धार्मिक स्थल होगा, जहां AI Command Control Center शुरू किया जा रहा है। इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने से लेकर सुरक्षा व्यवस्था और सहायता सेवाओं तक सब कुछ स्मार्ट तरीके से संभाला जाएगा। इसी कारण इसे देश का पहला AI-संचालित मंदिर (AI Temple of India) कहा जा रहा है।

AI in Tirupati Temple


वैकुंठम कॉम्प्लेक्स में बना हाई-टेक कमांड सेंटर

नया Integrated Command Control Center तिरुमला मंदिर के वैकुंठम-1 कॉम्प्लेक्स में स्थापित किया गया है। यहां एक विशाल डिजिटल स्क्रीन लगाई गई है, जिस पर मंदिर परिसर के सभी CCTV कैमरों की लाइव फीड देखी जा सकती है। इस सेंटर को 25 से ज्यादा तकनीकी विशेषज्ञों की टीम संचालित करेगी।

सबसे खास बात यह है कि इसमें लगे AI-सक्षम कैमरे न केवल चेहरों की पहचान (Facial Recognition) करेंगे, बल्कि यह भी गिन पाएंगे कि कतार में कितने श्रद्धालु मौजूद हैं और दर्शन में अनुमानित कितना समय लगेगा।

भीड़ प्रबंधन में मददगार होगा AI

AI सिस्टम 3D मैपिंग के जरिए मंदिर परिसर की भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की पहचान करेगा। यह भी बताएगा कि किस समय पर मंदिर में सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। इसके आधार पर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) अपने संसाधनों और दर्शन की व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित कर सकेगा।

सुरक्षा और सुविधा दोनों में सहयोग

  • AI सिस्टम चोरी या गलत गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान करेगा।
  • खोए हुए श्रद्धालुओं को उनके परिवार से मिलाने में मदद करेगा।
  • आपातकालीन स्थिति में यह सिस्टम भक्तों को सुरक्षित रास्ते की दिशा दिखाएगा।
  • अलीपिरी जैसे स्थानों पर अतिरिक्त कैमरे लगाए गए हैं, जिससे तीर्थयात्रा की शुरुआत से ही निगरानी हो सके।
  • AI श्रद्धालुओं के चेहरे के हावभाव को भी ट्रैक कर सकेगा, ताकि यदि किसी को परेशानी हो तो स्टाफ तुरंत मदद कर सके।

क्यों खास है यह पहल?

भारत में पहली बार किसी मंदिर में इतनी उन्नत तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसका उद्देश्य है श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और बेहतर भीड़ प्रबंधन। यह कदम न केवल धार्मिक स्थलों में डिजिटल क्रांति की शुरुआत है, बल्कि आने वाले समय में अन्य बड़े मंदिरों और धार्मिक स्थलों के लिए भी एक मिसाल बनेगा।

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