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Gudhi Padwa 2026: क्या होती है गुड़ी, क्यों की जाती है स्थापना? जानें तेल स्नान का महत्व और मां लक्ष्मी की कृपा का रहस्य

Gudhi Padwa 2026: हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक Gudhi Padwa इस साल 19 मार्च 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह पर्व Chaitra Navratri के साथ ही नए संवत्सर 2083 की शुरुआत का संकेत देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सृष्टि की रचना हुई थी, इसलिए इसे हिंदू नववर्ष के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। भारत के अलग-अलग राज्यों में इस पर्व को अलग नामों से जाना जाता है—महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, कर्नाटक में युगादी और आंध्र प्रदेश-तेलंगाना में उगादी।

Gudhi Padwa 2026


गुड़ी पड़वा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार:

  • प्रतिपदा तिथि शुरू: 19 मार्च, सुबह 6:52 बजे
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च, सुबह 4:52 बजे

इसी दिन से मराठी शक संवत 1948 का भी आरंभ माना जाता है।

क्या होती है गुड़ी और क्यों की जाती है स्थापना?

गुड़ी एक ध्वज या विजय पताका होती है, जिसे घर के मुख्य द्वार या छत पर ऊंचाई पर लगाया जाता है।

इसे बनाने के लिए:

  • बांस की लंबी डंडी
  • रंगीन या रेशमी कपड़ा
  • आम और नीम की पत्तियां
  • फूल
  • ऊपर उल्टा रखा हुआ चांदी, तांबे या पीतल का कलश

का उपयोग किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार गुड़ी विजय, समृद्धि और शुभता का प्रतीक है और इसे लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली आती है।

तेल स्नान का महत्व और मां लक्ष्मी की कृपा

गुड़ी पड़वा की सुबह जल्दी उठकर तेल स्नान (अभ्यंग स्नान) करने की परंपरा है।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन सुगंधित तेल से स्नान करने से:

  • शरीर की अशुद्धियां दूर होती हैं
  • रक्त संचार बेहतर होता है
  • मन में सकारात्मक ऊर्जा आती है

साथ ही धार्मिक मान्यता है कि इस दिन तेल स्नान करने से Goddess Lakshmi की कृपा प्राप्त होती है और घर में धन-समृद्धि आती है।

पारंपरिक व्यंजनों से होता है नववर्ष का स्वागत

इस खास अवसर पर महाराष्ट्र में कई पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जैसे:

  • Shrikhand
  • Puran Poli
  • राइस चकली
  • भाकरवड़ी

इन स्वादिष्ट पकवानों के साथ परिवार और रिश्तेदार मिलकर नए साल का स्वागत करते हैं।

क्यों खास है गुड़ी पड़वा

गुड़ी पड़वा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि नई शुरुआत, समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है। यह दिन हमें पुराने दुखों को पीछे छोड़कर नए उत्साह और ऊर्जा के साथ जीवन की शुरुआत करने का संदेश देता है।

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