Vijaya Ekadashi 2026 Upay: कल करें ये 3 अचूक उपाय, श्री हरि विष्णु की कृपा से पूरी होंगी मनोकामनाएं
Vijaya Ekadashi 2026: सनातन धर्म में विजया एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। इस वर्ष 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर विजया एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में सफलता, शत्रुओं पर विजय और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, विजया एकादशी को “विजय दिलाने वाली एकादशी” भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इस पावन दिन किए जाने वाले 3 विशेष उपाय, जिनसे श्री हरि विष्णु की कृपा प्राप्त हो सकती है।
विजया एकादशी 2026 के 3 अचूक उपाय
पीपल के पेड़ की पूजा और दीपदान
विजया एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पीपल के वृक्ष की पूजा करें।
- घी का दीपक जलाएं
- 7 बार परिक्रमा करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या विष्णु मंत्र का जाप करें
अंत में अपनी मनोकामना व्यक्त करें और अपने पापों के लिए क्षमा प्रार्थना करें। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
‘ॐ विष्णवे नमः’ उपाय से आर्थिक उन्नति
यदि आर्थिक संकट या कोई बड़ी परेशानी चल रही हो तो यह उपाय करें—
- घर में विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
- एक पान के पत्ते पर ‘ॐ विष्णवे नमः’ लिखें
- इसे भगवान के चरणों में अर्पित करें
- घी का दीपक जलाकर अपनी इच्छा व्यक्त करें
अगले दिन व्रत पारण के बाद उस पत्ते को पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे आर्थिक समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
पीली वस्तुओं का दान
विजया एकादशी के दिन व्रत और पूजा के साथ पीले रंग की वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। दान में आप फल, वस्त्र, दाल, तिल, हल्दी और मिठाई दे सकते हैं। कहा जाता है कि इससे पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
विजया एकादशी व्रत पारण का समय
द्रिक पंचांग के अनुसार,
व्रत तिथि: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)
पारण तिथि: 14 फरवरी 2026
पारण का शुभ समय: सुबह 7:00 बजे से 9:14 बजे तक
विजया एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो श्रद्धालु सच्चे मन से विजया एकादशी का व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उन्हें हर कार्य में सफलता और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह व्रत आत्मिक शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
