Mardani 3 Review: धाकड़ कॉप अवतार में रानी मुखर्जी, भिखारी-माफिया की घिनौनी दुनिया और दमदार फर्स्ट हाफ
Mardani 3 Review: बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘मर्दानी 3’ आखिरकार 30 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म का पहला शो खत्म होते ही सोशल मीडिया पर रानी के धाकड़ कॉप अवतार और कहानी की गंभीरता को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म एक बार फिर ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे संवेदनशील मुद्दे को उठाती है और फर्स्ट हाफ में दर्शकों को पूरी तरह बांधने में कामयाब रहती है।

शिवानी शिवाजी रॉय बनाम भयानक विलेन ‘अम्मा’
फिल्म में रानी मुखर्जी एक बार फिर शिवानी शिवाजी रॉय के रोल में नजर आती हैं। इस बार उनके सामने एक एम्बेसेडर की बेटी और उसकी केयरटेकर की बेटी के किडनैपिंग का केस है। जांच आगे बढ़ती है तो मामला एक खतरनाक ट्रैफिकिंग रिंग तक पहुंचता है, जिसे ‘अम्मा’ (मल्लिका प्रसाद) नाम की महिला चला रही है।
‘अम्मा’ का किरदार फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। उसकी एंट्री से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। भिखारी-माफिया और बच्चों की तस्करी से जुड़ी यह दुनिया बेहद डरावनी और घिनौनी दिखाई गई है। अम्मा इतनी खतरनाक है कि वह शिवानी के घर तक पहुंच जाती है, जिससे कहानी और ज्यादा पर्सनल हो जाती है।
फर्स्ट हाफ: मजबूत कहानी और दमदार परफॉर्मेंस
फिल्म का पहला भाग बेहद इंटेंस और एंगेजिंग है। रानी मुखर्जी फुल फॉर्म में नजर आती हैं और कहानी इतनी गंभीर है कि दर्शक तुरंत इसमें इन्वेस्ट हो जाता है। यहां सवाल सिर्फ एम्बेसेडर की बेटी को बचाने का नहीं, बल्कि उस गरीब केयरटेकर की बेटी का भी है—जिसके लिए क्या सिस्टम उतनी ही गंभीरता दिखाएगा?
सेकंड हाफ में थोड़ी ढील
जहां ‘मर्दानी 3’ का फर्स्ट हाफ मजबूत सेटअप बनाता है, वहीं सेकंड हाफ में फिल्म कुछ ज्यादा एक्सपेरिमेंट करने लगती है। कहानी में भिखारी-माफिया, ड्रग ट्रायल्स और इंटरनेशनल एंगल जुड़ जाते हैं। शिवानी सिस्टम के अंदर रहने वाली ईमानदार कॉप से आगे बढ़कर एक तरह के विजिलांटे रोल में आ जाती है।
दूसरे विलेन का स्टोरी आर्क थोड़ा अनबिलिवेबल लगता है और कई जगह लॉजिक कमजोर पड़ता है। अम्मा जैसा दमदार विलेन किरदार सेकंड हाफ में अंडरयूज्ड रह जाता है। हालांकि, रानी मुखर्जी की परफॉर्मेंस फिल्म को संभाले रखती है।
फैसला (Verdict)
कुल मिलाकर ‘मर्दानी 3’ एक दमदार विषय, सॉलिड फर्स्ट हाफ और रानी मुखर्जी की शानदार एक्टिंग के कारण देखने लायक फिल्म है। सेकंड हाफ में ओवर-एम्बिशन और ज्यादा फिल्मीपन थोड़ा ध्यान भटकाता है, लेकिन फिर भी रानी के फैंस और सीरियस क्राइम ड्रामा पसंद करने वालों के लिए यह फिल्म जरूर देखी जानी चाहिए।
